

Bihar Land Records: डिजिटल युग में जब हर लेन-देन पारदर्शी होने की उम्मीद की जाती है, बिहार में कुछ अधिकारी और कर्मचारी अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। तकनीक की चादर के नीचे, भ्रष्टाचार का एक नया ताना-बाना बुना जा रहा है।
बिहार में Bihar Land Records: अवैध रसीदों का खुलासा और विभागीय कार्रवाई
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक बड़ी गड़बड़ी का खुलासा किया है। विभाग की आंतरिक जांच में सामने आया है कि ऑफलाइन भू-लगान रसीद काटने पर प्रतिबंध के बावजूद, राज्य के कई जिलों में नियमों का उल्लंघन कर रसीदें जारी की गई हैं। यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब विभाग खुद इसे एक ‘आपराधिक षड्यंत्र’ की मंशा से जोड़कर देख रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जांच में विशेष रूप से सहरसा, सुपौल, वैशाली, सीतामढ़ी और मोतिहारी जिलों का नाम सामने आया है, जहां 30 अगस्त 2024 के बाद भी ऑफलाइन रसीदें काटी गई हैं। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही सभी संबंधित जिलों में हड़कंप मच गया है। प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी जिलाधिकारियों, एडीएम, डीसीएलआर और सीओ को सख्त पत्र भेजकर तत्काल रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह केवल विभागीय निर्देशों का उल्लंघन नहीं, बल्कि इसके पीछे आपराधिक मंशा भी साफ तौर पर दिखाई देती है।
विभाग ने सभी समाहर्ताओं से यह भी पूछा है कि उनके जिले में अप्रयुक्त (अव्यवहृत) रसीद के वॉल्यूम वर्तमान में किसके कब्जे में हैं। इस Land Revenue System में इस तरह की चूक गंभीर सवाल खड़े करती है। विभाग ने ऐसे पांच जिलों का उदाहरण भी दिया है जिन्होंने अपनी अप्रयुक्त रसीद के वॉल्यूम को अभिलेखागार में जमा करा दिया है। इनमें भागलपुर, शेखपुरा, पूर्णिया और दरभंगा शामिल हैं। विडंबना यह है कि सुपौल जिले का वॉल्यूम भी अभिलेखागार में जमा है, फिर भी वहां ऑफलाइन रसीदें काटी गईं, जो इस धोखाधड़ी की गहराई को दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रधान सचिव ने अपने पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पूर्व में जारी सभी विभागीय निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए, प्राप्त, उपयोग में लाई गई, अप्रयुक्त और शेष ऑफलाइन लगान रसीदों से संबंधित पूरी रिपोर्ट विभाग को अविलंब सौंपी जाए। इसके साथ ही यह भी जानकारी दी जाए कि अप्रयुक्त लगान रसीद (वॉल्यूम) को कहां और किसकी अभिरक्षा में रखा गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
उन्होंने उन अधिकारियों और कर्मचारियों को चिह्नित करने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया है जिन्होंने ऑफलाइन भू-लगान रसीदें जारी की हैं। यह कदम Land Revenue System में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ऑफलाइन रसीदों पर प्रतिबंध और नए नियम
विभाग ने 24 अप्रैल 2024 को ही ऑफलाइन भू-लगान रसीद काटने पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। उस समय यह निर्देश जारी किया गया था कि अंचल स्तर पर मौजूद सभी ऑफलाइन भू-लगान रसीदों को इकट्ठा कर जिला मुख्यालय में सुरक्षित स्थान पर रखा जाए। इन एकत्रित वॉल्यूम की सूची 14 अगस्त 2024 तक विभाग को उपलब्ध करानी थी।
राज्य के सभी अंचलों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि अब केवल ऑनलाइन भू-लगान रसीदें ही जारी की जाएं और भुगतान के बाद रैयतों या भू-धारकों को ऑनलाइन रसीद ही प्रदान की जाए।
भागलपुर के अपर समाहर्ता (राजस्व) दिनेश राम ने बताया कि उनके जिले में ऑफलाइन रसीद के सभी अप्रयुक्त वॉल्यूम अभिलेखागार में जमा करा दिए गए हैं। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि जिले के सभी 16 अंचलों में अब केवल ऑनलाइन भू-लगान रसीदें ही काटी जा रही हैं, जो विभाग के निर्देशों का उचित अनुपालन दर्शाता है।


