
जनजातीय विकास: बिहार में आदिवासियों के जीवन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को हथियार बनाने की तैयारी चल रही है। हाल ही में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहां इस बात पर मंथन हुआ कि कैसे शोध और नवाचारों को ज़मीन तक पहुँचाया जाए ताकि अंतिम व्यक्ति को इसका लाभ मिल सके।
जनजातीय विकास में तकनीक की भूमिका पर मंथन
जनजातीय गरिमा उत्सव–2026 के अवसर पर बिहार राज्य अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य विषय ‘तकनीक आधारित जनजातीय विकास’ था, जिसकी अध्यक्षता अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने की। इस मौके पर उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनजातीय विकास के लिए शोध और तकनीकी नवाचारों को धरातल से जोड़ना और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
विभागीय सचिव संदीप कुमार आर पुडकलकट्टी ने कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय समूहों से संबंधित योजनाओं का लाभ और उसके बारे में जानकारी उन तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) बड़ी भूमिका निभाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
विशेषज्ञों ने साझा किए नवाचारी सुझाव
कार्यशाला में देश भर से आए तकनीकी विशेषज्ञों और विद्वानों ने अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। प्रस्तुतियाँ और उनके विषय इस प्रकार रहे:
- आईआईटी पटना के प्रोफेसर डॉ. प्रीतम ने जनजातीय विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर प्रकाश डाला।
- आईआईटी पटना के सहायक प्रोफेसर डॉ. चेतन कुमार पटेल ने ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार आधारित विकास पर चर्चा की।
- फिलो ऐप के प्रतिनिधि दीपेश कुमार सिंह ने जनजातीय शिक्षा में एआई के उपयोग के बारे में बताया।
- सी-डैक के प्रतिनिधि सगुण बैजल ने डिजिटल इंडिया के लिए इनोवेटिंग इंटेलिजेंस पर अपना पक्ष रखा।
- गैर सरकारी संस्था प्रदान के प्रतिनिधि शमशाद परवेज ने ग्रामीण आजीविका सुदृढीकरण में तकनीक की भूमिका पर विचार साझा किए।
- वाधवानी एआई समूह की प्रतिनिधि अदिति पुथरन ने जनजातीय विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर एक और प्रस्तुति दी।
- जनजातीय कार्य मंत्रालय की तकनीकी टीम ने एआई चैटबॉट एवं एफआरए तकनीक विकास विषय पर जानकारी दी।
- आईआईटी पटना की सहायक प्रोफेसर श्वेता सिन्हा ने लुप्तप्राय जनजातीय भाषाओं एवं तकनीकी एकीकरण विषय पर प्रस्तुति दी।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राज्य के 24 जनजातीय जिलों से आए प्रखंड कल्याण पदाधिकारी एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







