
Nitish Kumar के दिल्ली जाने की चर्चा से बिहार में सियासी भूचाल, JDU नेता ने दी आत्मदाह की चेतावनी, पढ़ें पूरी खबर
Nitish Kumar: बिहार की सियासत में आजकल एक ही सवाल हवा में तैर रहा है – क्या नीतीश कुमार दिल्ली जा रहे हैं? इस एक सवाल ने मानो पूरी पार्टी में भूचाल ला दिया है और कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए हैं।
Nitish Kumar: के राज्यसभा जाने की अटकलों ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर एक बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री के इस संभावित कदम की खबर से पार्टी कार्यकर्ता गहरे सदमे में हैं और उनका गुस्सा अब सड़कों पर दिखने लगा है। 5 मार्च को पूरे प्रदेश में JDU कार्यकर्ताओं ने इस फैसले के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया और अपना आक्रोश व्यक्त किया। बात यहीं नहीं रुकी, कुछ नाराज कार्यकर्ताओं ने तो पटना स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ भी की थी।
क्यों Nitish Kumar को दिल्ली नहीं जाने देना चाहते समर्थक?
समर्थकों का मानना है कि नीतीश कुमार ही बिहार में JDU का एकमात्र चेहरा और पहचान हैं। उनका दिल्ली जाना बिहार को नेतृत्वविहीन करने जैसा होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यकर्ताओं को डर है कि उनके जाने से राज्य में पार्टी कमजोर हो जाएगी और राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनेगा। यही वजह है कि जेडीयू कार्यकर्ता अपने नेता को किसी भी कीमत पर बिहार में ही रोके रखना चाहते हैं।
यह नाराजगी थमने का नाम नहीं ले रही है। अब यह विरोध एक नए स्तर पर पहुंच गया है, जहां पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने ही मोर्चा खोल दिया है। JDU के प्रदेश महासचिव अमरेंद्र दास त्रिलोक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को रोकने के लिए सीएम आवास के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। वह अपने हाथ में एक बैनर लिए बैठे हैं, जिस पर लिखा है कि ‘नीतीश कुमार बिहार मत छोड़ो’।
‘जान दे देंगे, पर दिल्ली नहीं जाने देंगे’
अमरेंद्र दास त्रिलोक ने मीडिया से बात करते हुए साफ शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “हम किसी भी हालत में अपने मुख्यमंत्री को दिल्ली नहीं जाने देंगे। वह बिहार की आत्मा हैं और यहीं रहेंगे।” उनका आक्रोश यहीं नहीं रुका, उन्होंने भावुक होते हुए यहां तक कह दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अपनी जान भी दे देंगे, लेकिन अपने नेता को बिहार से दूर नहीं जाने देंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहां नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर कयासबाजी का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का यह भावुक और आक्रामक विरोध यह दिखाता है कि नीतीश कुमार आज भी JDU के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। अब देखना यह होगा कि क्या नीतीश कुमार अपने कार्यकर्ताओं की गुहार सुनते हैं या फिर राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाते हैं।






