
Bihar Fire Safety: अशोक राजपथ स्थित खान हेल्थकेयर अस्पताल की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। अग्निशमन विभाग ने दूसरी बार अस्पताल का फायर सेफ्टी ऑडिट किया, जिसमें फिर से कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को कड़ा नोटिस जारी करते हुए 10 दिनों के भीतर सभी आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया है। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय में आग से बचाव और नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने पर अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
दोबारा जांच में भी नहीं सुधरे हालात
बिहार अग्निशमन विभाग की टीम ने 7 जून को भी खान हेल्थकेयर अस्पताल का फायर सेफ्टी ऑडिट किया था। उस समय भी कई कमियां पाई गई थीं और प्रबंधन को उन्हें तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, दूसरी जांच में सामने आया कि अधिकांश कमियां अब तक दूर नहीं की गई हैं, जो मरीजों की सुरक्षा को सीधे तौर पर खतरे में डालती हैं।




जांच के दौरान पाया गया कि आग लगने की स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों के सुरक्षित निकास के लिए वैकल्पिक सीढ़ी की व्यवस्था अब तक नहीं की गई है। यह वही गंभीर कमी है जो पहली जांच में भी सामने आई थी। इसके अलावा, अस्पताल में ऑटोमेटिक वेट राइजर सिस्टम भी नदारद मिला, जो आग बुझाने के लिए बेहद आवश्यक होता है।
बिना फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट चल रहा अस्पताल
अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न करने की हद यह है कि स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम केवल दो फ्लोर तक ही सीमित हैं। पूरे भवन में आग से बचाव के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है। अग्निशमन विभाग के अनुसार, खान हेल्थकेयर अस्पताल बिना फायर सेफ्टी ऑडिट सर्टिफिकेट के ही संचालित हो रहा है। यह स्थिति पटना में पटना के अन्य अस्पतालों पर भी सवाल खड़े करती है, जो बिना उचित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के चल रहे हैं।
लोदीपुर फायर स्टेशन के प्रभारी इंद्रजीत कुमार ने स्पष्ट किया, ‘अस्पताल प्रबंधन को दूसरी बार नोटिस जारी किया गया है। यदि 10 दिनों के भीतर सभी कमियों को दूर कर अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, तो नियमानुसार अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।’
यह अल्टीमेटम अस्पताल प्रबंधन के लिए अंतिम चेतावनी है। यदि अगले 10 दिनों में अग्नि सुरक्षा संबंधी सभी कमियों को दूर नहीं किया जाता है, तो खान हेल्थकेयर अस्पताल पर ताला लग सकता है। यह घटना अन्य अस्पतालों के लिए भी एक गंभीर सबक है कि मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।







