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Lakhisarai News: पूर्व DM मिथिलेश कुमार EOU Investigation के फंदे में, महज़ 18 महीने का कार्यकाल और ‘भूख की गंध’ जांच शुरू, पढ़िए EOU का बिछाया जाल… बात निकली है अभी दूर तलक जाएगी!

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Lakhisarai EOU Investigation: बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। लखीसराय के पूर्व जिला मजिस्ट्रेट (DM) मिथिलेश कुमार के लगभग सवा साल के कार्यकाल की जांच के लिए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने कमर कस ली है। पटना स्थित आर्थिक अपराध इकाई (EOU) मुख्यालय ने कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों की लिखित शिकायतों के आधार पर यह बड़ा फैसला लिया है। मिथिलेश कुमार, जो 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, पहले भी विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्यरत रहे हैं, जिनमें मध्याह्न भोजन योजना में उनकी भूमिका चर्चा में रही थी। अब उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों और विभिन्न विभागों में हुए कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं, जिनकी जांच के लिए यह व्यापक अभियान शुरू किया गया है।

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Lakhisarai EOU Investigation: शस्त्र लाइसेंस और खेल विभाग पर EOU का शिकंजा

आर्थिक अपराध इकाई की टीम सुबह करीब 10 बजे लखीसराय के डीएम कार्यालय पहुंच चुकी है। सबसे पहले टीम ने डिप्टी कलेक्टर शशि भूषण कुमार से मुलाकात कर शस्त्र लाइसेंस से संबंधित फाइलों की जांच शुरू की है। पिछले एक साल से अधिक अवधि में जारी किए गए सभी शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया, नियमों के अनुपालन और दस्तावेजों की सत्यता की गहन पड़ताल की जा रही है। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में कई अहम तथ्यों का खुलासा हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इसके बाद, जांच टीम जिला खेल पदाधिकारी मीनल रंजन से भी मुलाकात करेगी। टीम कला, संस्कृति कार्यक्रमों और खेल विभाग से संबंधित सभी फाइलों की समीक्षा करेगी। इन विभागों में हुए खर्च, कार्यक्रमों के आयोजन की प्रक्रिया और पारदर्शिता के स्तर को विस्तार से परखा जाएगा। अधिकारियों से पूछताछ के साथ-साथ दस्तावेजों का मिलान भी किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आ सके। पढ़िए विस्तार से

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Lakhisarai DM Probe: लखीसराय में एक बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार की परतें अब खुलना शुरू हो गई हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पूर्व जिलाधिकारी मिथिलेश कुमार के 18 महीने के कार्यकाल की सघन जांच शुरू कर दी है, जिससे जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। टीम कई महत्वपूर्ण विभागों की फाइलों को बारीकी से खंगाल रही है।

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बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की पांच-सदस्यीय टीम लखीसराय पहुँच चुकी है। टीम ने मंगलवार को तत्कालीन जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्रा के लगभग 18 माह के कार्यकाल की गहन जांच शुरू की। सबसे पहले, टीम कलेक्ट्रेट पहुंची और कार्यवाहक जिलाधिकारी तथा अपर जिलाधिकारी (ADM) नीरज कुमार से मुलाकात की। इसके बाद, उन्होंने विभागीय अधिकारियों से विस्तार से पूछताछ की और कई फाइलों की बारीकी से जांच की।

लखीसराय DM जांच: पूर्व डीएम मिथिलेश कुमार के कार्यकाल की होगी गहन पड़ताल

जांच का मुख्य केंद्र प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के लिए धान खरीद आवंटन, सरकारी कार्यक्रमों, त्योहारों और ओपन-एयर जिम परियोजनाओं में हुई कथित अनियमितताएं, साथ ही कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा किए गए खर्च हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ विशिष्ट व्यक्तियों की लिखित शिकायत के आधार पर पटना स्थित ईओयू कार्यालय ने यह कार्रवाई शुरू की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह जांच सिर्फ ऊपरी तौर पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में गहराई तक उतरकर की जा रही है।

EOU टीम ने किन-किन फाइलों को खंगाला?

EOU टीम ने जिलाधिकारी के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) और जिला शस्त्र अधिकारी शशि कुमार से हथियारों के लाइसेंस जारी करने और उससे संबंधित फाइलों के बारे में जानकारी मांगी। इसके साथ ही, जिला नाजिर अधिकारी प्राची कुमारी के माध्यम से विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों की भी जांच की गई। ईओयू की टीम ने डिप्टी कलेक्टर शशि भूषण कुमार से शस्त्र लाइसेंस संबंधी फाइलों की गहन जांच की। पिछले एक साल से अधिक समय की सभी शस्त्र लाइसेंस फाइलों को टीम बारीकी से खंगाल रही है। इसके बाद टीम खेल पदाधिकारी मीनल रंजन से भी मिली और कला, संस्कृति कार्यक्रमों तथा खेल से संबंधित सभी फाइलों और विभागीय कार्यप्रणाली की समीक्षा की। टीम इन विभागों में हुए कार्यों की प्रक्रिया, पारदर्शिता और दस्तावेजों की जांच करेगी।

धान खरीद और शस्त्र लाइसेंस भी जांच के दायरे में

मिथिलेश कुमार 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और इससे पहले मध्याह्न भोजन योजना में बतौर अधिकारी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। EOU टीम जिले के सभी विभागों की कार्यप्रणाली पर नजर डालेगी। यह देखा जाएगा कि मिथिलेश कुमार के कार्यकाल में विभिन्न विभागों ने कौन-कौन से विकास कार्य किए, उनकी प्रक्रिया कैसी रही और इनमें कितनी पारदर्शिता बरती गई। हर विभाग की फाइलों को बारी-बारी से जांचा जाएगा। इस Lakhisarai DM Probe का उद्देश्य किसी भी अनियमितता को उजागर करना है। जांच के दौरान धान खरीद प्रक्रिया और इससे जुड़े अहम दस्तावेजों की भी गहन छानबीन की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि धान खरीद से संबंधित रिकॉर्ड्स को विशेष रूप से देखा जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह अभियान दो-तीन दिन या उससे अधिक समय तक चलने की आशंका जताई जा रही है, जिससे और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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पूर्व DM मिथिलेश कुमार के कार्यकाल की होगी गहन पड़ताल, कई विभागों की फाइलें खंगालने की तैयारी

ईओयू की यह जांच केवल कुछ विभागों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिले के सभी प्रमुख विभागों को इसके दायरे में शामिल किया गया है। टीम यह आकलन करेगी कि मिथिलेश कुमार के कार्यकाल में किन-किन विकास कार्यों को मंजूरी दी गई, उन्हें कैसे लागू किया गया और उनमें वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं का कितना पालन हुआ। हर विभाग की फाइलों को क्रमवार खंगाला जाएगा, जिससे पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।

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धान खरीद में अनियमितता और प्रशासनिक फेरबदल: EOU की लंबी जांच

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू धान खरीद से जुड़ा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, धान खरीद प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे संबंधित सभी रिकॉर्ड्स, भुगतान विवरण और भंडारण से जुड़े दस्तावेजों की गहन छानबीन की जाएगी। इस दौरान अधिकारियों से पूछताछ भी हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह पूरा अभियान दो से तीन दिनों तक चल सकता है, हालांकि जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। इस बीच, प्रशासन ने पूर्व DM मिथिलेश कुमार को उनके पद से हटा दिया है और उन्हें पटना सचिवालय की सामान्य शाखा में पदस्थापित किया गया है। जांच के दौरान उन्हें लखीसराय के अवकाश भवन में रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रक्रिया प्रभावित न हो। लखीसराय के नए डीएम को लेकर भी अटकलें तेज हैं; प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि आसपास के किसी जिले के आईएएस अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। कुल मिलाकर, इस व्यापक Lakhisarai EOU Investigation से न केवल पूर्व DM के कार्यकाल की पारदर्शिता सामने आएगी, बल्कि भविष्य में प्रशासनिक जवाबदेही को भी बल मिलेगा।

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