IRCTC Scam: न्याय की चौखट पर उम्मीदों का चिराग लिए खड़े लालू यादव को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। सियासी गलियारों में भूचाल लाने वाले इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें कोई राहत नहीं दी है।
IRCTC Scam: निचली अदालत के फैसले पर रोक से इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार, 5 जनवरी को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को IRCTC घोटाला मामले में बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा की पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। इस फैसले से लालू यादव को फिलहाल कोई राहत नहीं मिल पाई है, जिससे उनके समर्थकों में मायूसी है। यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के दौरान लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए हुआ था, जब उन्होंने कथित तौर पर रेलवे होटल के टेंडर निजी कंपनियों को दिए थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से इस संबंध में जवाब भी मांगा है। जांच एजेंसी को मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी पेश करने को कहा गया है। अब इस रेलवे घोटाला की अगली सुनवाई की तारीख पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
क्या है पूरा मामला?
IRCTC घोटाला दरअसल रेलवे के दो होटलों, रांची और पुरी को निजी कंपनियों को लीज पर देने से जुड़ा है। सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव ने बतौर रेल मंत्री अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। इसके बदले उन्हें और उनके परिवार को कथित तौर पर बेनामी संपत्ति मिली। इस मामले में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और कई अन्य लोग आरोपी हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं, लेकिन फिलहाल कोर्ट ने सीबीआई की दलीलों को अधिक महत्व दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?
दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करने के बाद, अब लालू यादव के कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। उनके वकील आगे की रणनीति पर काम कर रहे हैं। सीबीआई का जवाब आने के बाद अदालत इस मामले में अगली सुनवाई करेगी। यह मामला भारतीय राजनीति में हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है और इस पर देश भर की निगाहें बनी हुई हैं। यह कानूनी जंग अभी और लंबी चलने की संभावना है। बिहार की राजनीति में इस फैसले के दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप हमेशा विश्वसनीय और सच्ची खबरें पढ़ते रहें, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




