
Bihar Assembly News: बिहार, वह भूमि जिसने लोकतंत्र के बीज बोए और उन्हें वटवृक्ष बनाया, आज एक नए संकल्प के साथ अपनी संसदीय विरासत को सम्मान दे रही है। इसी कड़ी में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के ऐतिहासिक उद्बोधन ने राज्य के विधायी इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।
बिहार विधानसभा: अध्यक्ष ओम बिरला का ऐतिहासिक उद्बोधन – ‘सशक्त विधायक ही लोकतंत्र की प्राणवायु’
बिहार विधानसभा: लोकतंत्र की शक्ति का मूलमंत्र
लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला अपने एक दिवसीय बिहार दौरे पर पटना पहुँचे। उन्होंने बिहार विधान सभा के 102वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने बिहार की गौरवशाली लोकतांत्रिक परंपराओं को नमन करते हुए कहा कि यह धरती लोकतंत्र की जन्मस्थली रही है और यहाँ की समृद्ध विरासत ने देश की संसदीय व्यवस्था को मजबूत वैचारिक आधार प्रदान किया है।
श्री बिरला ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एक सशक्त विधायक ही सशक्त लोकतंत्र की नींव होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनता के विश्वास से चुनकर आए सशक्त जनप्रतिनिधि जब जनसमस्याओं को समाधान तक पहुँचाते हैं, तभी लोकतंत्र को वास्तविक ऊर्जा मिलती है और कानून निर्माण की प्रक्रिया सार्थक बनती है। वे विधायी प्रक्रियाओं को जनहितैषी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि विधायक की वास्तविक शक्ति केवल पद में नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजगता और संवैधानिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ में निहित होती है। एक सक्षम और जागरूक विधायक ही शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने ‘PRIDE’ संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यह विधायकों की क्षमता निर्माण का एक सशक्त मंच बन गया है। बदलते समय और चुनौतियों के मद्देनजर, नए और अनुभवी दोनों विधायकों के लिए नियमित प्रशिक्षण बेहद आवश्यक है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करता है कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन प्रभावी ढंग से कर सकें।
श्री बिरला ने विधायी ड्राफ्टिंग की बारीकियों, नियमों की गहरी समझ और शोध-आधारित अनुभवों को गुणवत्तापूर्ण कानून निर्माण का आधार बताया। उन्होंने कहा कि इन तत्वों के बिना बनाए गए कानून उतने प्रभावी नहीं हो सकते, जितनी उनसे अपेक्षा की जाती है। यह लोकतांत्रिक मूल्य के साथ न्याय करने का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
लोकसभा अध्यक्ष ने सदन को लोकतंत्र का मंदिर बताते हुए कहा कि इसकी गरिमा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि का सर्वोच्च दायित्व है। उन्होंने आज के समय में सभागृहों की घटती मर्यादा पर चिंता व्यक्त की। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/।
उन्होंने नारेबाजी, व्यवधान और वेल में आने जैसी प्रवृत्तियों से बचने की अपील करते हुए संवाद और तर्क के माध्यम से अपनी बात रखने पर जोर दिया। बिरला ने कहा कि वे विधानसभाएं ही सशक्त होंगी जिनके जनप्रतिनिधि संविधान को जानेंगे, हमारे लोकतांत्रिक मूल्य की गरिमा को समझेंगे और सदन में सार्थक चर्चा करेंगे। यह हमारे लोकतांत्रिक मूल्य की पहचान है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उन्होंने विधायकों से आह्वान किया कि वे ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों, किसानों, महिलाओं और युवाओं की आवाज़ को प्राथमिकता देकर सदन में उठाएँ, ताकि जन-जन की आवाज सदन तक पहुँचे और उसका त्वरित समाधान हो सके। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी वर्ग उपेक्षित न रहे।
डिजिटल सशक्तिकरण की ओर बढ़ता बिहार
अपने संबोधन के अंत में, लोकसभा अध्यक्ष ने ‘नेवा (NeVA) प्लेटफॉर्म’ के माध्यम से बिहार विधान सभा के डिजिटल होने को एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम विधानसभा की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और तथ्य-आधारित बनाएगा। यह एक प्रगतिशील पहल है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
श्री बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल रिकॉर्ड और डेटा विधायकों को हर बहस में मजबूत और प्रभावी प्रस्तुतिकरण करने में मदद करेंगे। इससे न केवल उनकी तैयारी बेहतर होगी, बल्कि सदन में होने वाली चर्चाओं का स्तर भी ऊँचा उठेगा।




