
महिला सशक्तिकरण: बिहार में जीविका दीदियों ने एक बार फिर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है। अब ये दीदियां राज्य के सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता दूत बनकर न सिर्फ हजारों महिलाओं को रोजगार दे रही हैं, बल्कि अपनी आय से आत्मनिर्भरता की नई गाथा भी लिख रही हैं। हाल ही में बिजली विभाग के साथ हुए समझौते ने उनके इस सफर को एक नई दिशा दी है। पटना से मिली जानकारी के अनुसार, ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) और साउथ बिहार पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एसबीपीडीसीएल) के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद, इन जीविका दीदियों ने बिजली विभाग के 65 कार्यालयों में साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभाल ली है।
बिजली विभाग में नई जिम्मेदारी: महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण
इस पहल पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी कार्यालयों में साफ-सफाई का कार्य जीविका समूहों को सौंपना महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और सेवा गुणवत्ता में सुधार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने बताया कि इस मॉडल के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें सम्मानजनक आजीविका से भी जोड़ा जा रहा है। सरकार भविष्य में इस सफल मॉडल को अन्य संस्थानों में भी लागू करने की दिशा में प्रयासरत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में 700 से अधिक सरकारी एवं निजी इकाइयों में जीविका दीदियां साफ-सफाई सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इस वृहद नेटवर्क से 7,000 से अधिक महिलाओं को सीधा रोजगार सृजन मिला है, जिनकी मासिक आय 8,000 से 12,000 रुपये के बीच है। यह उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
जीविका दीदियों का बढ़ता प्रभाव: रोजगार के नए अवसर
जीविका दीदियां विभिन्न सरकारी संस्थानों में पहले से ही अपनी सेवाएं सफलतापूर्वक दे रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ हुए समझौतों के तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और अनुमंडल अस्पतालों में साफ-सफाई का कार्य उनके जिम्मे है। इसके अतिरिक्त, राज्य के सभी आवासीय अनुसूचित जाति/जनजाति विद्यालयों, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग के आवासीय विद्यालयों और अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में भी यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हीं के द्वारा निभाई जा रही है। नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एनबीपीडीसीएल) के सभी कार्यालयों में भी साफ-सफाई का जिम्मा इन्हीं मेहनती दीदियों के पास है।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इन दीदियों की सेवाओं से कार्यालयों में स्वच्छता और कार्यप्रणाली की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है। एसबीपीडीसीएल के साथ हुई यह नई साझेदारी न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, बल्कि जीविका दीदियों की सामाजिक और आर्थिक भूमिका को और भी अधिक सशक्त करेगी। भविष्य में इस सफल मॉडल को अन्य विभागों और संस्थानों में भी लागू करने की व्यापक योजना है, जिसका लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
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