Meerut Murder Case: मेरठ के बहुचर्चित नीला ड्रम कांड में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मर्चेंट नेवीकर्मी सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या के दोषी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा दी
है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया, जिससे 590 दिन के भीतर पीड़ित परिवार को इंसाफ मिला। कोर्ट ने हत्या के साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोनों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा। पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला। सजा सुनते ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर फूट-फूटकर रोने लगे मुस्कान और साहिल।
जज ने मुस्कान से पूछा, पति की हत्या में दोषी हो, क्या सजा चाहती हो?। मुस्कान ने कहा, मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए, फिर रही खामोश।
साहिल से भी जज ने पूछा सवाल, लेकिन वह कुछ हीं बोला। फांसी की सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ राजपूत की मां।
सौरभ की मां बोलीं ,शांति से न्याय मिल गया।
सबूत मिटाने के लिए शव के पांच टुकड़े कर नीले ड्रम में भरा, फिर डाला था सीमेंट का घोल।
फैसला सुनते ही दोनों दोषी फफक-फफक कर रोने लगे। मुस्कान ने रोते हुए अपनी बेटियों का हवाला दिया। अदालत ने इस दौरान भागवत गीता का जिक्र करते हुए कहा कि अपराधियों को उनके अपराध के अनुरूप दंड देना भी धर्म है। सौरभ राजपूत की मां ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया है।
नृशंस हत्या और लाश ठिकाने लगाने का पूरा घटनाक्रम
ब्रह्मपुरी के इंदिरानगर निवासी मर्चेंट नेवीकर्मी सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 की रात को घर के अंदर ही हुई थी। उसकी पत्नी मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। मुस्कान ने खाने में बेहोशी की दवा मिलाकर सौरभ को बेहोश किया और फिर सीने में चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद दोनों ने मिलकर घर के बाथरूम में लाश के टुकड़े किए। सिर को धड़ से अलग कर दिया गया और दोनों हाथ भी कलाई से काट दिए गए। लाश को नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से जमा दिया गया था।
हत्या और लाश को ठिकाने लगाने के बाद साहिल और मुस्कान टैक्सी लेकर हिमाचल प्रदेश फरार हो गए। वहां दोनों अय्याशी करते रहे और एक मंदिर में शादी भी कर ली थी। 18 मार्च 2025 को जब दोनों मेरठ वापस लौटे, तब इस हत्याकांड का खुलासा हुआ। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर नीले ड्रम से सौरभ की लाश बरामद की थी।
फास्ट-ट्रैक सुनवाई और 22 गवाहों की भूमिका
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केके चौबे और वादी पक्ष के वकील विजय बहादुर ने कोर्ट में 22 गवाह पेश किए। पुलिस ने एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें तमाम साक्ष्य जुटाए गए थे। 30 सितंबर 2026 को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की कोर्ट ने साहिल और मुस्कान को दोषी करार दिया था।
पूरे मामले में 590 दिन के भीतर न्याय मिला, जिसमें कोर्ट में 127 तारीखें लगीं। हत्याकांड में कोई चश्मदीद गवाह सामने नहीं आया, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य, पुलिस की जांच रिपोर्ट और फोरेंसिक रिपोर्ट सजा का आधार बनीं। कोर्ट ने इस केस में फास्ट-ट्रैक की तरह लगातार सुनवाई की।
अभियोजन पक्ष की दलीलें और दोषियों का पछतावा
कोर्ट में बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि साहिल और मुस्कान का समाज में रहना खतरनाक है। मुस्कान ने पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया। पूरी वारदात को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। दोषियों को कभी अपनी क्रूरता का पछतावा नहीं हुआ, न ही उन्होंने कभी माफी मांगी। हत्या के बाद उनका हिल स्टेशन पर जाकर घूमना उनकी विकृत मानसिकता को दर्शाता है। अभियोजन ने इसे विरलतम श्रेणी का अपराध बताते हुए फांसी की मांग की और कहा कि ऐसे अपराधियों पर नरमी समाज के लिए घातक है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए बताया गया कि ऐसे दोषियों पर दया करने से न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम होता है।
बचाव पक्ष ने मुस्कान की दो बेटियों का हवाला देते हुए और इसे पहला अपराध बताते हुए कम सजा की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई। फांसी की सजा सुनते ही दोनों कैमरे पर फूट-फूटकर रोने लगे। मुस्कान ने रोते हुए अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर चिंता जताई। जेल प्रशासन ने दोनों को संभाला है और वरिष्ठ जेल अधीक्षक के अनुसार, उनकी खास निगरानी के साथ काउंसलिंग भी कराई जाएगी। सुरक्षा कारणों से पूरे ट्रायल के दौरान मुस्कान और साहिल को सिर्फ दो बार ही कोर्ट में पेश किया गया, बाकी पेशियां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुईं क्योंकि 19 मार्च 2025 को कोर्ट पेशी के दौरान भीड़ ने उन पर हमला कर दिया था।








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