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फ़रवरी, 14, 2026
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Mokama Taal Issue: बिहार विधानसभा में गरजा मोकामा टाल का मुद्दा, किसानों की पीड़ा से सदन में हंगामा

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Mokama Taal Issue: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में एक बार फिर टाल क्षेत्र की समस्याओं का सैलाब उमड़ पड़ा है, जहां अन्नदाता हर साल कुदरत की मार और सरकारी उदासीनता के दोहरे चक्रव्यूह में फंसकर अपनी किस्मत को कोसते हैं। दलहन और मक्का की खरीद से लेकर जलजमाव तक, किसानों की पीड़ा सदन में गूँज उठी, जिससे राज्य की कृषि व्यवस्था और जल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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Mokama Taal Issue: टाल क्षेत्र की दशकों पुरानी समस्या

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को मोकामा-बड़हिया टाल क्षेत्र के किसानों की अनसुनी पुकार सदन में एक बड़े मुद्दे के रूप में उभरी। जलजमाव, लगातार फसल नुकसान और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर दलहन व मक्का की सही खरीद न होने से जूझ रहे बिहार के किसान अपनी बदहाली की दास्तान लेकर सदन तक पहुंचे। जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया, जिससे राज्य की कृषि नीतियों और जल प्रबंधन की खामियों पर बहस तेज हो गई है। यह सिर्फ एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि सूबे के अन्नदाताओं की व्यापक समस्या का प्रतीक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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मोकामा और बड़हिया टाल का इलाका अपनी दलहनी फसलों के लिए जाना जाता है, लेकिन हर साल बारिश के मौसम में यह विशाल क्षेत्र जलमग्न हो जाता है, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं। समय पर पानी की निकासी न होना और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक न पहुंचना उनकी परेशानी का मुख्य कारण है। इस साल भी किसानों को दलहन और मक्के की सही कीमत नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी दयनीय हो गई है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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क्या है टाल क्षेत्र की प्रमुख माँगें?

सदन में विधायकों ने किसानों की कई प्रमुख माँगें उठाईं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मांग जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान है। किसानों का कहना है कि जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से उनकी हजारों एकड़ फसलें हर साल पानी में डूब जाती हैं। इसके साथ ही, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन और मक्का की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग भी जोर-शोर से की गई।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, टाल क्षेत्र की उर्वर भूमि को अगर सही जल प्रबंधन और सरकारी सहयोग मिले तो यह बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था में एक बड़ा योगदान दे सकती है। लेकिन दशकों से यह क्षेत्र केवल समस्याओं का गढ़ बना हुआ है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों की इन जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करे और त्वरित कदम उठाए ताकि बिहार के किसान खुशहाल हो सकें और अपनी उपज का सही दाम पा सकें। यह समय की मांग है कि सरकार टाल क्षेत्र के लिए एक समग्र विकास योजना बनाए।

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