Munger Revenue News: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने हाल ही में मुंगेर समेत कई जिलों के राजस्व अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में मंत्री ने राजस्व कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त न करने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा न होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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भूमि बैंक निर्माण और पुराने मामलों पर बड़ा फैसला
मंत्री डॉ. जायसवाल ने समीक्षा के दौरान सभी जिलों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता के आधार पर भूमि बैंक का निर्माण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, दस साल से अधिक पुराने सभी राजस्व मामलों की विशेष रूप से समीक्षा की जाए। सरकारी जमीनों पर की गई अवैध या गलत जमाबंदियों को तत्काल रद्द करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह कदम राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए उठाया जा रहा है।
राजस्व न्यायालयों में गुणवत्तापूर्ण निर्णयों पर जोर
राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्णयों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल वादों के निष्पादन की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दिए गए निर्णयों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। मंत्री ने बताया कि कमजोर और त्रुटिपूर्ण आदेश अक्सर उच्च न्यायालयों में टिक नहीं पाते हैं।
इसलिए, सभी स्तरों के न्यायालयों में गुणवत्तापूर्ण निर्णय सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगली समीक्षा बैठक से जिला समाहर्ता और प्रमंडलीय आयुक्त स्तर के न्यायालयों के कार्यों की भी नियमित समीक्षा की जाएगी। यह कदम न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
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ऑनलाइन प्रक्रिया में बाधा डालने वालों पर गिरेगी गाज
राजस्व महा-अभियान के तहत प्राप्त आवेदनों की समीक्षा करते हुए, मंत्री ने सभी लंबित आवेदनों की स्कैनिंग और ऑनलाइन प्रविष्टि का काम तत्काल पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने जानकारी दी कि परिमार्जन के लिए लगभग 40 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, और इनके समयबद्ध निष्पादन से फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान को गति मिलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है और मुख्य सचिव स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा की जा रही है।
मंत्री ने दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस और ई-मापी जैसे मामलों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा कि ‘डिफेक्ट चेक’ के नाम पर आवेदनों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा कि पुराने लंबित मामलों के साथ-साथ प्रतिदिन प्राप्त होने वाले नए आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन करना सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे हर हाल में पूरा करना होगा।
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डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि विभाग पूरी तरह से ऑनलाइन प्रणाली पर काम कर रहा है। इसलिए, अंचल स्तर पर किसी भी प्रकार का काम ऑफलाइन मोड में नहीं होना चाहिए। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी ऑफलाइन काम करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के इस सख्त रुख से राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है, और उम्मीद है कि इससे कार्यों में तेजी और पारदर्शिता आएगी।







