बिहार के लाखों राशन कार्डधारकों पर संकट: ई-केवाईसी न होने पर बंद होगा मुफ्त राशन, मिली जानकारी के अनुसार बिहार के नालंदा जिले में बड़ी संख्या में राशन कार्डधारकों पर मुफ्त राशन बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। लाखों पात्र लाभुकों ने अभी तक ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। प्रशासन ने इन सभी से 30 जून तक यह अनिवार्य प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। समय सीमा के भीतर सत्यापन न होने पर उनका राशन बंद किया जा सकता है, जिससे वे सरकार की महत्वपूर्ण योजना के लाभ से वंचित हो जाएंगे।
नालंदा जिले में कुल 23 लाख 65 हजार 346 राशन कार्डधारक हैं। इनमें से अब तक केवल 19 लाख 50 हजार 429 लोगों का ही ई-केवाईसी हो पाया है। इसका मतलब है कि जिले के लगभग 4 लाख 14 हजार 917 लाभार्थियों ने अभी तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। यह आंकड़ा चिंताजनक है और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत करता है।
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ई-केवाईसी क्यों है जरूरी? फर्जीवाड़ा रोकने का उपाय
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य किया है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि केवल पात्र व्यक्तियों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिले। अधिकारियों का कहना है कि इसके माध्यम से डुप्लीकेट और मृत लाभार्थियों की पहचान करके उन्हें सूची से हटाया जा सकेगा।
ई-केवाईसी आधार से जुड़ा होने के कारण ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना को भी मजबूती मिलती है। इससे लाभार्थी देश के किसी भी हिस्से में अपने हिस्से का राशन प्राप्त कर सकते हैं। इस कदम से वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंच सकेगा और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।
ई-केवाईसी के लिए समय सीमा कई बार बढ़ाई गई है। दिसंबर 2025 में विशेष अभियान चलाए जाने के बाद फरवरी, मार्च, अप्रैल और जून 2026 तक इसकी अंतिम तिथियों में लगातार वृद्धि की गई। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में लाभुक अभी भी पीछे हैं। प्रशासन ने अब 30 जून को अंतिम अवसर बताते हुए सभी कार्डधारियों से जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया है।
किस प्रखंड में कितने लाभुक हैं पीछे? जानें पूरा आंकड़ा
जिले के कुल लाभार्थियों में से लगभग 17 प्रतिशत लोग अभी भी ई-केवाईसी से वंचित हैं। कुछ प्रखंडों में यह स्थिति और भी गंभीर है। बिहारशरीफ, हरनौत, करायपरसुराय और नगरनौसा जैसे प्रखंडों में 80 प्रतिशत से भी कम लाभार्थियों का सत्यापन हो पाया है। यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों में जागरूकता और प्रक्रिया को पूरा करने की गति धीमी है।
दूसरी ओर, परवलपुर, बेन, नूरसराय और चंडी प्रखंडों ने ई-केवाईसी के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है। वहां अधिकांश लाभार्थियों ने अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे वे मुफ्त राशन योजना का लाभ बिना किसी बाधा के ले पा रहे हैं। Biharsharif eKYC News इस संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस प्रखंड में सबसे अधिक लाभार्थी वंचित हैं।
जिला आपूर्ति पदाधिकारी सोमनाथ सिंह ने जानकारी दी कि लाभार्थी अपने नजदीकी जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) विक्रेता के पास जाकर फिंगरप्रिंट के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, मोबाइल ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे प्रक्रिया को और सुगम बनाया जा सके। निर्धारित तिथि तक प्रक्रिया पूरी न होने पर संबंधित राशन कार्ड से नाम हटाने की कार्रवाई की जा सकती है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
प्रखंडवार आंकड़ों के अनुसार, बिहारशरीफ में ई-केवाईसी के सर्वाधिक 83 हजार 18 मामले लंबित हैं। इसके बाद हरनौत में 31 हजार 390 और इस्लामपुर में 26 हजार 785 लाभार्थियों का सत्यापन बाकी है। परवलपुर में यह संख्या केवल 6 हजार 991 है, जबकि कतरीसराय में सबसे कम 5 हजार 173 लाभार्थियों का ई-केवाईसी लंबित है। ये आंकड़े प्रशासन के लिए चुनौती पेश करते हैं और लक्षित अभियान की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
मृत लाभुकों के नाम हटाने का अभियान भी तेज
सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए जिले में एक विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान भी चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत मृत राशन कार्डधारकों की पहचान कर उनके नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। नवंबर 2025 की एक रिपोर्ट के आधार पर 29 हजार 732 मृत कार्डधारकों की पहचान की गई थी। इनमें से लगभग 90 प्रतिशत के नाम या तो हटा दिए गए हैं या उन्हें हटाने की प्रक्रिया चल रही है।
जिला प्रशासन के अनुसार, राजगीर और बिहारशरीफ अनुमंडल में यह कार्य लगभग पूरा हो चुका है। प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि फर्जी नामों को हटाकर वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे। बिहारशरीफ प्रखंड में सर्वाधिक 4 हजार 426 मृत लाभार्थियों की पहचान की गई थी, जबकि कतरीसराय में यह संख्या सबसे कम 463 थी। अधिकारियों को शेष मामलों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वितरण प्रणाली को और अधिक कुशल बनाया जा सके।
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इस अभियान और ई-केवाईसी के माध्यम से नालंदा जिले में राशन वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। सभी पात्र लाभार्थियों से अपील है कि वे अंतिम तिथि से पहले अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके और उन्हें मुफ्त राशन का लाभ मिलता रहे।
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