Nalanda Teacher News: बिहार के नालंदा जिले में सरकारी स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पटना हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद चल रही इस सत्यापन प्रक्रिया में अब तक पांच शिक्षकों के प्रमाण-पत्र संदिग्ध पाए गए हैं। इन शिक्षकों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप है, जिससे पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
बिहार में बड़े पैमाने पर चल रही शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के बीच फर्जी प्रमाण-पत्रों के जरिए नौकरी पाने वाले कुछ शिक्षकों पर गाज गिरी है। सूत्रों के अनुसार, निगरानी विभाग की गहन जांच के बाद यह मामला सामने आया है। इस खुलासे ने राज्य की शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर किया है और ऐसे मामलों में और भी बढ़ोतरी होने की आशंका है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
जांच में उजागर हुआ चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों के गहन सत्यापन के निर्देश दिए थे। कोर्ट की सख्ती के बाद निगरानी विभाग द्वारा विस्तृत जांच चल रही है, जिसमें अब तक पांच शिक्षकों के प्रमाण-पत्र संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें बी.एड., बी.ए. और अन्य कई तरह की डिग्रियां शामिल हैं, जो फर्जी पाई गई हैं।
निगरानी विभाग की शिकायत के आधार पर संबंधित थानों में प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। इस बड़े खुलासे के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप का माहौल है। बताया जा रहा है कि जांच का दायरा और भी बढ़ने की संभावना है, जिससे आने वाले समय में कई और बड़े नाम और फर्जी शिक्षक सामने आ सकते हैं।
एक शिक्षिका पर हुई पहली कार्रवाई, ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
इस फर्जीवाड़े की शुरुआत हिलसा प्रखंड के पचरुखिया उत्क्रमित मध्य विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका शारदा रानी के मामले से हुई। उन्हें वर्ष 2013 में नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति के समय उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से जारी एक बी.एड. प्रमाण-पत्र जमा किया गया था, जो जांच के घेरे में आ गया।
निगरानी विभाग ने जब उत्कल विश्वविद्यालय से शिक्षिका शारदा रानी के प्रमाण-पत्र का सत्यापन कराया, तो विश्वविद्यालय ने एक चौंकाने वाला जवाब दिया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह प्रमाण-पत्र पूरी तरह से फर्जी है और उनके रिकॉर्ड में शारदा रानी का कोई भी नाम या डिग्री दर्ज नहीं है। इसके बाद हिलसा थाना में कांड संख्या 447/2026 दर्ज कर शिक्षिका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इन शिक्षकों ने केवल फर्जी बी.एड. ही नहीं, बल्कि बी.ए. और अन्य कई फर्जी डिग्रियां भी बनवाकर सरकारी नौकरी पाई है। वे लंबे समय से सरकारी वेतन का लाभ उठा रहे थे, जिससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हुआ है।
पटना हाईकोर्ट की कड़ी निगरानी और आगे की कार्रवाई
पटना हाईकोर्ट इस पूरे मामले पर अपनी कड़ी निगरानी बनाए हुए है। कोर्ट की सक्रियता के कारण शिक्षा विभाग और निगरानी विभाग अब पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई करने में जुटा है। यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है ताकि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म किया जा सके और फर्जी डिग्रीधारी शिक्षकों को बाहर किया जा सके।
बिहार में शिक्षा विभाग में इस तरह के फर्जीवाड़े का यह पहला मामला नहीं है। अतीत में भी शिक्षकों की बहाली में धांधली और फर्जी प्रमाण-पत्रों के इस्तेमाल के कई आरोप लगे हैं। हालांकि, पटना हाईकोर्ट की इस बार की सक्रियता से कड़ी कार्रवाई और दोषियों पर नकेल कसने की उम्मीद जगी है। यह Bihar Education Department Scam राज्य की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
सेवा समाप्ति के साथ वेतन वसूली का भी होगा एक्शन
निगरानी विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि शेष अन्य संदिग्ध शिक्षकों के खिलाफ भी जल्द ही अलग-अलग थानों में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इन सभी शिक्षकों के खिलाफ सेवा समाप्ति की प्रक्रिया भी तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, अब तक सरकारी खजाने से लिए गए वेतन की वसूली की कार्रवाई भी पूरी सख्ती के साथ की जाएगी।
इस पूरे मामले से बिहार की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की उम्मीद जताई जा रही है। फर्जीवाड़े में शामिल सभी लोगों पर नकेल कसने के लिए विभाग और जांच एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







