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मार्च, 3, 2026
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अब गांवों में लगेगा जल चौपाल, मुखिया और उपमुखिया को मिली जवाबदेही

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अब गांवों में जल चौपाल लगेगा। पेयजल और स्वच्छता संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन पर लोगों से सरकार सुझाव लेगी। जिस पर अफसरों को अमल करना होगा। इसका लक्ष्य योजनाओं के क्रियान्वयन में सामाजिक भागीदारी और पारदर्शिता लाना है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने पंचायती राज विभाग और ग्रामीण विकास विभाग को पत्र लिखा है। इसमें गांवों को चौपाल लगाने के लिए जिल और प्रखंड अफसरों की संयुक्त टीम बनाने का सुझाव दिया गया है।

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सरकार गांवों में शुद्ध पेयजल योजना के क्रियान्वयन में समाज के हर तबके के लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने जा रही है। गांवों में लोकल जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की मदद से जल चौपाल लगेगा। इसमें योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की जाएगी। सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि पेयजल, स्वच्छता और इंदिरा आवास समेत अन्य योजना के तहत समाज के सभी वर्गो का सहयोग लेकर चौपाल लगाएं।

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इसके लिए सभी मुखिया एवं उप मुखिया को पेयजल निश्चय योजना की दीर्घकालीन अनुरक्षण नीति पर विशेष ध्यान देने के लिए सजग रहने को कहा है। सप्ताह में 1 दिन ग्राम पंचायत में जल चौपाल आयोजित कर लोगों को उपभोक्ता शुल्क वसूली, जलापूर्ति का दुरुपयोग नहीं करने, अनधिकृत मोटर पंप का उपयोग नहीं करने इत्यादि के संदर्भ में ग्रामीणों को जागरूक करेंगे।

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स्पष्ट है कि ग्राम पंचायत इन सभी मामलों में दंड आरोपित कर सकती है। यदि कहीं वित्तीय अनियमितता या गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं होने का मामला प्रकाश में आता है तो उसे संज्ञान में दें ताकि अग्रेतर कार्रवाई की जा सके।

सभी जनप्रतिनिधि निरंतर क्षेत्र भ्रमण कर योजनाओं के क्रियान्वयन का सतत निरीक्षण एवं अनुश्रवण करें ताकि गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित किया जा सके। सभी तकनीकी सहायकों को पूर्व में ही निर्देश दिया गया है कि ईपौलीएक्ट ऐप के माध्यम से सभी पूर्ण योजनाओं का भौतिक निरीक्षण करते हुए सुनिश्चित करें कि प्राकल्लन एवं दर्ज मापी पुस्तिका के आलोक में कार्य किया गया है।

पंचायत सरकार भवन की क्रियाशीलता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है। सभी जनप्रतिनिधि नियमित रूप से पंचायत सरकार भवन में बैठें तथा रोस्टर के अनुसार सभी कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करें। लगातार अनुपस्थित रहने वाले कर्मियों के बारे में भी सूचित करें। पूर्व में भी इस संदर्भ में पत्र निर्गत किया जा चुका है।

पंचायत सरकार भवन की क्रियाशीलता सुनिश्चित किए बिना मिनी कलेक्ट्रेट के रूप में इसकी पहचान नहीं बन पाएगी। निरंतर क्षेत्र भ्रमण एवं पंचायत सरकार भवन की क्रियाशीलता के माध्यम से ही स्वशासित इकाईयों के रूप में त्रिस्तरीय संस्थाओं की प्रशासनिक प्रणाली विकसित होगी।

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आदर्श ग्राम पंचायत के रूप में अपने क्षेत्र को विकसित करने का निरंतर प्रयास करें जो सभी मानकों यथा स्वच्छता, कचरा प्रबंधन,जल निकासी के बुनियादी ढांचे, पंचायत सरकार भवनों का सौंदर्यीकरण, अन्य संरचनात्मक आवश्यकताओं इत्यादि पर खरा उतरे।

इन सभी कार्यों के लिए 15वें वित्त एवं षष्टम वित्त से प्राप्त निधि में स्पष्ट प्रावधान दिए गए हैं।साथ ही जिला पंचायत संसाधन केंद्र के सभी प्रशिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि विभागीय दिशा निर्देश के आलोक में यह सुनिश्चित करें कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला जनप्रतिनिधि स्वयं भाग लें, ना कि अपने किसी मनोनित प्रतिनिधि के माध्यम से।

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