

बिहार न्यूज। दरअसल, नितिन नवीन बीजेपी के नए अध्यक्ष बने हैं। इसको लेकर बिहार विपक्ष के चेहरा तेजस्वी यादव ने अपने x पर इसको लेकर बड़ा हमला किया है। जानिए क्या हे इस पोस्ट केआईने जिससे बिहार पॉलिटिक्स में गर्मी आ गई है।
अक्सर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं द्वारा कुछ चेहरों को ‘आम आदमी’ या ‘ज़मीन से जुड़ा कार्यकर्ता’ बताकर उनकी खूब प्रशंसा की जाती है। इन चेहरों में एक नाम बिहार के कद्दावर नेता और मंत्री नितिन नवीन का भी है। लेकिन क्या वाकई नितिन नवीन का राजनीतिक सफर किसी सामान्य कार्यकर्ता जैसा रहा है? आइए जानते हैं कुछ ऐसे तथ्य जो इस धारणा पर सवाल खड़े करते हैं।
तेजस्वी ने लिखा है दरअसल, नितिन नवीन के पिताजी स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा बिहार भाजपा के एक बहुत बड़े और प्रभावशाली नेता थे। उनका कद राज्य भाजपा में शीर्ष तीन-चार नेताओं में गिना जाता था। वह पटना पश्चिम विधानसभा, जिसे अब बांकीपुर के नाम से जाना जाता है, से लगातार चार बार विधायक चुने गए थे। उनकी राजनीतिक विरासत बिहार भाजपा में गहरी जड़ों वाली थी।
जनवरी 2006 में नवीन किशोर सिन्हा के निधन के बाद, बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में भाजपा ने नितिन नवीन को अपना उम्मीदवार बनाया। यहां यह समझना ज़रूरी है कि यह टिकट उन्हें एक ‘आम कार्यकर्ता’ होने के नाते नहीं मिला था, बल्कि अपने दिवंगत पिता की राजनीतिक विरासत और उनके बड़े नेता होने के कारण मिला था।
तेजस्वी यादव आगे लिखा है, नितिन नवीन तब से लगातार विधायक हैं और पिछले कई वर्षों से बिहार सरकार में मंत्री का पद भी संभाल रहे हैं। यह उनके राजनीतिक सफर का एक ऐसा पहलू है जो अक्सर ‘ज़मीनी कार्यकर्ता’ की कहानी से इतर ‘वंशवाद की राजनीति’ के प्रभाव को दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
क्या परिवारवाद ने खोला नितिन नवीन के लिए राह?
तेजस्वी की माने तो, इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि नितिन नवीन का राजनीति में प्रवेश और उनका प्रारंभिक उदय ‘वंशवाद की राजनीति’ के प्रत्यक्ष परिणाम थे। उन्हें पहली बार विधायक का टिकट उनकी पार्टी के लिए की गई किसी ज़मीनी या साधारण कार्यकर्ता वाली मेहनत के आधार पर नहीं मिला था, बल्कि उनके पिता के राजनीतिक रसूख और उनकी विरासत ने उनके लिए यह राह आसान बनाई थी।
यह सिर्फ एक उदाहरण है जो बताता है कि राजनीति में ‘आम कार्यकर्ता’ और ‘विशेष पृष्ठभूमि’ वाले नेताओं के बीच का अंतर अक्सर धुंधला होता है। ज़मीनी हकीकत पर आधारित ऐसी ही विश्वसनीय खबरें पढ़ने के लिए आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ऐसे में, जब किसी नेता को ‘आम कार्यकर्ता’ बताया जाता है, तो उसके पीछे के तथ्यों को जानना और समझना बेहद ज़रूरी हो जाता है। नितिन नवीन का मामला दिखाता है कि कई बार राजनीतिक वंशवाद किस प्रकार एक नेता के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, भले ही उसे ‘ज़मीन से जुड़ा’ बताने का प्रयास किया जाए।

