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दिसम्बर, 13, 2025

नीतीश सरकार का बड़ा ऐलान, अनुपूरक बजट में महिलाओं के लिए खोला 21 हजार करोड़ का पिटारा

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पटना:

बिहार विधानसभा में बुधवार को जो हुआ, उसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। नई सरकार ने आते ही अपना पिटारा खोल दिया, लेकिन सबकी नजरें उस एक घोषणा पर टिकी हैं, जिसे नीतीश कुमार का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। आखिर क्या है वो घोषणा जिसने महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान ला दी है?

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बिहार विधानसभा चुनाव में वापसी करने के बाद नीतीश सरकार ने बुधवार को अपना पहला अनुपूरक बजट पेश किया। सरकार ने कुल 91 हजार 717 करोड़ रुपये का बजट पेश कर विभिन्न योजनाओं के लिए खजाना खोल दिया। इस बजट के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में राज्य के विकास और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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बजट में महिला सशक्तिकरण पर सबसे ज्यादा जोर

इस भारी-भरकम अनुपूरक बजट में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली घोषणा महिलाओं के लिए की गई है। नीतीश सरकार ने महिला सशक्तिकरण और रोजगार को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने विशेष रूप से महिलाओं के लिए 21 हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है, जो कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा है।

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इस कदम को राज्य में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस राशि से महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

किन क्षेत्रों पर खर्च होगी यह राशि?

सरकार द्वारा की गई इस घोषणा के बाद अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि इस 21 हजार करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किन योजनाओं के लिए किया जाएगा। हालांकि अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस बजट का फोकस इन क्षेत्रों पर हो सकता है:

  • महिलाओं के लिए नई उद्यमिता योजनाओं की शुरुआत करना।
  • स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाना।
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना।
  • महिलाओं के कौशल विकास (Skill Development) के लिए नए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के ठीक बाद महिलाओं पर केंद्रित यह घोषणा, सरकार की भविष्य की रणनीति को दर्शाती है। यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, बल्कि राज्य की राजनीति पर भी इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।

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