Bihar CM: राजनीति की भूलभुलैया में रिश्तों की डोर कभी नहीं टूटती, ठीक वैसे ही जैसे घने कोहरे में भी घर का रास्ता साफ़ दिखाई देता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नए साल के पहले दिन इस बात को एक बार फिर साबित कर दिया, जब वे अपनी माँ की यादों और लोगों के बीच अपने पैतृक गाँव पहुंचे।
Bihar CM: नए साल पर नीतीश कुमार का पैतृक गाँव दौरा, माँ को दी श्रद्धांजलि और जनता से संवाद
नए साल का पहला दिन अक्सर लोग उत्सव और सैर-सपाटे में बिताते हैं, लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी माँ की स्मृतियों को ताज़ा करने में समर्पित किया। घने कोहरे की चादर ओढ़े सुबह-सुबह मुख्यमंत्री अपने परिवार के साथ अपने पैश्तैनी गाँव की ओर रवाना हुए। यह यात्रा महज एक औपचारिक दौरा नहीं थी, बल्कि इसमें निजी भावनाएं और जनता से सीधा संवाद भी शामिल था। मुख्यमंत्री का यह पैतृक गांव का दौरा राजनीति से परे एक भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।
Bihar CM: परिवार संग पैतृक गाँव में नीतीश कुमार का भावुक पल
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पैतृक गाँव स्थित स्मृति वाटिका में अपनी पूज्य माता स्वर्गीय परमेश्वरी देवी की 16वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। माँ की स्मृतियों में लीन मुख्यमंत्री ने भावुक होकर उन्हें नमन किया। यह क्षण उनकी निजी आस्था और पारिवारिक मूल्यों को उजागर करता है। सोलह वर्ष बीत जाने के बाद भी माँ के प्रति उनका स्नेह और सम्मान आज भी उतना ही गहरा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पल उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक था।
पैतृक गाँव पहुँचने पर मुख्यमंत्री का स्थानीय लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने गाँव के हर वर्ग के लोगों से मुलाकात की, उनकी कुशल-क्षेम पूछी और उनकी समस्याओं को भी सुना। यह जनसंवाद किसी चुनावी दौरे से अलग था, जहाँ मुख्यमंत्री एक अभिभावक के रूप में लोगों से सीधे जुड़ रहे थे। उन्होंने उनकी शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुना और समाधान का आश्वासन भी दिया। इस पैतृक गांव का दौरा ने मुख्यमंत्री और आम जनता के बीच की खाई को पाटने का काम किया।
जनसंवाद और विकास की पहल
मुख्यमंत्री ने गाँव के विकास कार्यों का भी जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी हर समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री केवल अपनी निजी यात्रा पर नहीं थे, बल्कि उन्होंने इसे जनता से जुड़ने और उनके कल्याण के लिए एक अवसर के रूप में भी देखा। ऐसे मौके राजनीति और मानवीय संवेदनाओं का दुर्लभ संगम प्रस्तुत करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको हर ख़बर से अवगत कराता है।
स्मृति वाटिका, जहाँ मुख्यमंत्री ने अपनी माँ को श्रद्धांजलि दी, उनके परिवार के लिए एक पवित्र स्थल है। यह न केवल उनकी माँ की याद दिलाता है, बल्कि गाँव के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी है। ऐसे स्थलों का रखरखाव और उनका सम्मान सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
मुख्यमंत्री का नए साल के पहले दिन का यह पैतृक गाँव का दौरा, जहाँ उन्होंने अपनी माँ को याद किया और जनता से सीधा संवाद स्थापित किया, एक मजबूत संदेश देता है। यह संदेश रिश्तों की अहमियत, जड़ों से जुड़ाव और सार्वजनिक जीवन में व्यक्तिगत मूल्यों के महत्व का है। यह दिखाता है कि एक नेता चाहे कितनी भी ऊँचाई पर पहुँच जाए, अपनी मिट्टी और परिवार को कभी नहीं भूलता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






