
Bihar Politics: सियासत की डगर पर कदम बढ़ते ही, कभी मंदिर की सीढ़ियां विकास की राह गढ़ती हैं, तो कभी संकल्पों की नई इबारत बिहार के भविष्य को संवारती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में बोधगया के महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की, जो नई सरकार के गठन के बाद उनकी पहली महत्वपूर्ण यात्रा रही। मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि “विकास पुरुष” के नाम से विख्यात मुख्यमंत्री ने बिहार में शांति और समग्र विकास के लिए प्रार्थना की। उन्होंने बोधि वृक्ष के समक्ष पूजा में भाग लिया और भगवान बुद्ध के सार्वभौमिक शांति संदेश को वर्तमान विश्व के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
इस आध्यात्मिक यात्रा से ठीक एक दिन पहले, मंगलवार को नीतीश कुमार ने बिहार में “7 निश्चय-3” कार्यक्रम की घोषणा कर राज्य के विकास पथ पर एक और मील का पत्थर स्थापित किया। यह कार्यक्रम उनकी महत्वाकांक्षी ‘7 निश्चय योजना’ की तीसरी कड़ी है, जिसने बिहार में विकास की नई दिशा तय की है। योजना का पहला चरण 2015 से 2020 तक चला, जबकि ‘7 निश्चय-2’ कार्यक्रम 2020 से 2025 तक क्रियान्वित किया गया।मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा, “24 नवंबर, 2005 को हमारी सरकार के गठन के बाद से, राज्य में कानून का शासन रहा है, और लगातार 20 वर्षों तक सभी क्षेत्रों और वर्गों के विकास के लिए काम किया गया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि राज्य में सुशासन के तहत 7 निश्चय (2015-2020) और 7 निश्चय-2 (2020-2025) कार्यक्रमों में न्यायपूर्ण विकास से संबंधित लक्ष्यों को प्राप्त करने के बाद, अब बिहार को सबसे विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने के लिए 7 निश्चय-3 कार्यक्रम को लागू करने का निर्णय लिया गया है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बयान दर्शाता है कि राज्य सरकार सुशासन और चहुंमुखी विकास के प्रति कितनी गंभीर है।नीतीश कुमार ने ‘7 निश्चय-3’ के सात प्रमुख संकल्पों पर प्रकाश डाला। इनमें सबसे प्रमुख ‘दोहरा रोजगार’ है, जिसका लक्ष्य राज्य की औसत प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनेक कार्यक्रम और योजनाएं लागू की गई हैं। ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत, राज्य की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 10,000 रुपये की प्रारंभिक सहायता दी जा रही है। इस योजना के लाभार्थियों को रोजगार विस्तार के लिए 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी मिल सकेगी।मुख्यमंत्री ने 2023 में संपन्न हुए जाति-आधारित और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण का भी जिक्र किया। इस सर्वेक्षण में 94 लाख परिवारों की पहचान की गई है, जिन्हें रोजगार योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इन योजनाओं के माध्यम से बिहार के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/यह पहलें दर्शाती हैं कि राज्य सरकार न केवल आर्थिक सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। यह नए बिहार की नींव रखने का एक और प्रयास है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




