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मार्च, 5, 2026
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Nitish Kumar: इंजीनियर ‘मुन्ना’ से मुख्यमंत्री तक: बिहार की सियासत के बेताज बादशाह नीतीश कुमार की कहानी

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Nitish Kumar: सियासत की बिसात पर कोई चेहरा ऐसा नहीं, जिसने इतनी बार पाला बदला हो और हर बार सत्ता की कुंजी अपने हाथ में रखी हो। पटना की इंजीनियरिंग की गलियों से निकलकर बिहार के राजनीतिक अखाड़े में छा जाने तक का सफर, संघर्ष और सत्ता का खेल, नीतीश कुमार की कहानी हर मोड़ पर एक नई किताब लगती है।

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इंजीनियर ‘मुन्ना’ से मुख्यमंत्री तक: बिहार की सियासत के बेताज बादशाह Nitish Kumar की कहानी

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर किसी रोमांचक उपन्यास से कम नहीं है। पटना में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले एक सामान्य छात्र से लेकर बिहार की राजनीति के सबसे कद्दावर और प्रभावशाली नेताओं में शुमार होने तक, उनकी यात्रा कई दिलचस्प मोड़ों से गुजरी है। छात्र आंदोलन की चिंगारी से शुरू हुई उनकी राजनीतिक मशाल ने कई चुनावी पराजयों, अनगिनत संघर्षों और अप्रत्याशित उतार-चढ़ावों का सामना करते हुए अंततः बिहार की सत्ता के शिखर तक का रास्ता तय किया। राजधानी पटना में आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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इंजीनियरिंग के दिनों से Nitish Kumar का राजनीतिक उदय

नीतीश कुमार, जिन्हें कभी उनके करीबी ‘मुन्ना’ कहकर पुकारते थे, ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे राजनीति का रुख किया। उनका राजनीतिक जीवन 1970 के दशक में जेपी आंदोलन से शुरू हुआ, जिसने उन्हें तत्कालीन छात्र नेताओं के बीच एक पहचान दिलाई। इस आंदोलन ने उन्हें समाजवाद और जन-समस्याओं के समाधान की दिशा में सोचने को प्रेरित किया।

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यह भी पढ़ें:  Nitish Kumar Rajya Sabha: क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना कार्यकर्ताओं से धोखा है? पढ़िए...'यह साजिश है'

शुरुआती दौर में उन्हें कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विधानसभा चुनावों में हार, गठबंधन की राजनीति में उठापटक और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी दृढ़ता और राजनीतिक सूझबूझ ने उन्हें बिहार की सियासत में एक अहम स्थान दिलाया।

संघर्ष और सफलता की गाथा

नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे, जहां उन्होंने रेल और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। इन अनुभवों ने उन्हें प्रशासनिक कौशल और देश की जरूरतों की गहरी समझ दी। लेकिन उनकी असली पहचान बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में बनी, जिस पद पर वे रिकॉर्ड 10 बार आसीन हुए हैं।

मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में बिहार में कई विकास कार्य हुए। कानून-व्यवस्था में सुधार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहल, और महिला सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदम उनके शासनकाल की प्रमुख उपलब्धियों में से हैं। बिहार की सियासत में उनका योगदान अविस्मरणीय है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

एक दूरदर्शी नेता की पहचान

नीतीश कुमार को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो बदलते राजनीतिक परिदृश्य को बखूबी समझते हैं और उसके अनुसार अपनी रणनीति तैयार करते हैं। उनकी गठबंधन बनाने और तोड़ने की क्षमता ने उन्हें अक्सर ‘पलटू राम’ की उपाधि भी दिलवाई, लेकिन इसके बावजूद वे बिहार के राजनीतिक समीकरणों में हमेशा केंद्र बिंदु बने रहे। यह उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता और जनमानस पर पकड़ का ही परिणाम है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एक इंजीनियर के तौर पर उन्होंने जो विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित की थी, वह उनके राजनीतिक निर्णयों में भी झलकती है। यही कारण है कि वे बिहार को एक नई दिशा देने में सफल रहे और आज भी राज्य की राजनीति में उनका प्रभाव बरकरार है।

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