
Bihar Liquor Ban: बिहार की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसी खुमारी छाई है, जो सीधे ‘शराबबंदी’ के नशे से मुकाबला कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने की अटकलों के बीच, राज्य में लागू शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर से तेज बहस छिड़ गई है। इसी मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की पूर्व महिला नेत्री ऋतु जायसवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी है, जिससे यह चर्चा और भी गरमा गई है।
Bihar Liquor Ban: नीतीश कुमार का राज्यसभा मार्ग और शराबबंदी पर फिर गरम हुई बिहार की सियासत
Bihar Liquor Ban: क्या शराबबंदी कानून का होगा पुनरावलोकन?
नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं। चर्चा है कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है, जिसके बाद बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर किसी और के काबिज होने की संभावना है। हालांकि, इन सभी अटकलों के बीच, राज्य की सबसे बड़ी सामाजिक और राजनीतिक नीतियों में से एक – शराबबंदी – पर नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कई राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह समय है जब सरकार को अपनी शराबबंदी नीति पर फिर से विचार करना चाहिए।
राज्य में 2016 से लागू शराबबंदी कानून को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से लगातार सवाल उठते रहे हैं। जहां एक ओर सरकार इसे महिलाओं और समाज के हित में एक बड़ा कदम बताती है, वहीं दूसरी ओर इसके क्रियान्वयन और कथित विफलताओं को लेकर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। अवैध शराब की बिक्री, जहरीली शराब से मौतें और तस्करों के बढ़ते हौसले ने इस कानून पर हमेशा प्रश्नचिह्न लगाए हैं।
पूर्व राजद नेत्री ऋतु जायसवाल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावनाओं और शराबबंदी कानून के भविष्य को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में सक्रिय होते हैं, तो क्या बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा? उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब राज्य की जनता भी इस कानून के कई पहलुओं से त्रस्त दिख रही है।
शराबबंदी कानून के कारण जेलों में बंद हजारों लोग, पुलिस और प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप, और पड़ोसी राज्यों से अवैध शराब की खेप का लगातार आना – ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्होंने इस कानून की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऋतु जायसवाल ने इन बिंदुओं को उठाते हुए सरकार से इस कानून की समीक्षा की मांग की है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
शराबबंदी के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
शराबबंदी कानून का सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी व्यापक रहा है। एक तरफ जहां कई परिवार शराब के दुष्प्रभाव से बचे हैं और घरेलू हिंसा में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर, राज्य को राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, अवैध शराब व्यापार ने एक समानांतर अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है, जिससे अपराध में वृद्धि हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस शराबबंदी नीति की प्रभावशीलता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
राजद नेत्री ने अपने पोस्ट में पूछा है कि क्या नीतीश कुमार के केंद्रीय राजनीति में जाने के बाद बिहार में शराबबंदी को लेकर नए सिरे से सोचा जाएगा या यह कानून यथावत बना रहेगा? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस कानून ने बिहार की राजनीति और समाज पर गहरा असर डाला है। आने वाले समय में देखना होगा कि बिहार की राजनीति में यह ‘खुमारी’ क्या रंग लाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मुख्यमंत्री के संभावित अगले कदम और शराबबंदी कानून पर हो रही नई बहस बिहार के राजनीतिक क्षितिज पर एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। राज्य की जनता और राजनीतिक दल दोनों ही इस मुद्दे पर सरकार के अगले रुख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। क्या बिहार एक बार फिर शराबमुक्त राज्य की अपनी प्रतिबद्धता को लेकर कोई बड़ा निर्णय लेगा या फिर इसमें कोई संशोधन किया जाएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।






