
Pappu Yadav Security: पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के उस फैसले पर तीखी टिप्पणी की है, जिसमें पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा घटाकर Y श्रेणी कर दी गई थी। कोर्ट ने अब उनकी Y+ श्रेणी की सुरक्षा को तत्काल बहाल करने का आदेश दिया है। इस फैसले ने बिहार सरकार को एक बड़ा झटका दिया है और प्रशासनिक मनमानी पर सवाल खड़े किए हैं।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
क्या है पूरा Pappu Yadav Security मामला?
यह मामला तब शुरू हुआ जब पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने अपनी सुरक्षा कम किए जाने के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग और अन्य आपराधिक गिरोहों का जिक्र भी शामिल था। सांसद ने कहा कि खतरे के इनपुट मिलने के बाद सरकार ने 9 अगस्त 2025 को उनकी सुरक्षा बढ़ाकर Y+ की थी, लेकिन मात्र डेढ़ महीने बाद 23 सितंबर 2025 को बिना किसी स्पष्ट कारण के इसे घटाकर Y श्रेणी कर दिया गया। जस्टिस जितेंद्र कुमार की बेंच ने इस कटौती को मनमाना प्रशासनिक फैसला करार दिया। अदालत ने गृह विभाग को तत्काल Y+ सुरक्षा बहाल करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने क्यों पलटा बिहार सरकार का आदेश?
सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि आखिर किस आधार पर सांसद की सुरक्षा कम की गई। कोर्ट के सामने ऐसी कोई रिपोर्ट पेश नहीं की जा सकी जिससे यह साबित हो सके कि पप्पू यादव पर खतरा कम हो गया था। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सुरक्षा घटाने से पहले न तो सांसद को जानकारी दी गई और न ही उनका पक्ष सुना गया, जो कानून के अनुरूप नहीं था। अदालत ने इसे एकतरफा और मनमाना निर्णय माना। कोर्ट ने गृह विभाग को भविष्य में ऐसे मामलों में पारदर्शिता बरतने और सभी तथ्यों व खुफिया रिपोर्टों पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी। इस मामले में बिहार हाईकोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर देता है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
राजनीतिक हलचल और आगे क्या?
पटना हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। पप्पू यादव पहले भी कई बार अपनी सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जता चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था। पप्पू यादव पहले भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट भी गए थे, जिसने उन्हें बिहार हाईकोर्ट का फैसला लेने के लिए वापस पटना भेजा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में हाईकोर्ट उचित आदेश पारित कर सकता है। अब हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि पूर्णिया सांसद की Pappu Yadav Security Y+ श्रेणी में ही रहेगी। गृह विभाग को तत्काल इस आदेश का पालन करना होगा।
क्या है Pappu Yadav Security विवाद?
पटना हाईकोर्ट ने पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की Y+ श्रेणी की सुरक्षा को फिर से बहाल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बिहार सरकार के उस फैसले पर तीखी टिप्पणी की, जिसमें सितंबर 2025 में उनकी सुरक्षा को घटाकर Y श्रेणी कर दिया गया था। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि यह कानून के अनुरूप नहीं था क्योंकि सांसद को न तो पहले से जानकारी दी गई और न ही उनका पक्ष सुना गया। जस्टिस जितेंद्र कुमार की बेंच ने इस कार्रवाई को एक मनमाना प्रशासनिक फैसला करार दिया। गृह विभाग को तत्काल प्रभाव से Y+ सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब पप्पू यादव ने अपनी सुरक्षा कम किए जाने के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में अदालत को बताया कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने लॉरेंस बिश्नोई गैंग और अन्य आपराधिक गिरोहों से खतरे का भी जिक्र किया था। सांसद ने दलील दी कि खतरे के इनपुट मिलने के बाद सरकार ने 9 अगस्त 2025 को उनकी सुरक्षा बढ़ाकर Y+ की थी, लेकिन केवल डेढ़ महीने बाद 23 सितंबर 2025 को बिना किसी स्पष्ट कारण के इसे घटा दिया गया।
सरकार क्यों नहीं दे पाई जवाब?
सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार सरकार से पूछा कि आखिर किस आधार पर पप्पू यादव की सुरक्षा कम की गई। राज्य सरकार कोर्ट के सामने ऐसी कोई रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई, जिसमें यह कहा गया हो कि सांसद पर खतरा कम हो गया है। अदालत ने माना कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रशासन को तय प्रक्रिया और पारदर्शिता का पालन करना अनिवार्य है। किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा कम करने से पहले उससे जुड़ी एजेंसियों की रिपोर्ट और संबंधित व्यक्ति का पक्ष दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पटना हाईकोर्ट का फैसला इस बात पर भी जोर देता है कि सुरक्षा से जुड़े निर्णय मनमाने ढंग से नहीं लिए जा सकते।
उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी और आगे की राह
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सुरक्षा से जुड़े फैसले केवल औपचारिकता के आधार पर नहीं लिए जा सकते। अदालत ने गृह विभाग को भविष्य में ऐसे मामलों में और अधिक पारदर्शिता बरतने की सलाह दी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा समीक्षा के दौरान सभी तथ्यों और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। पप्पू यादव पहले भी कई बार अपनी सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जता चुके हैं। उन्होंने लगातार धमकियां मिलने और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को अपर्याप्त बताने का दावा किया था। इसी वजह से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था, जहां उन्होंने Y श्रेणी की सुरक्षा को बढ़ाकर Z श्रेणी करने की मांग की थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले को सीधे सुनने के बजाय पटना हाईकोर्ट में सूचीबद्ध कराने की सलाह दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में हाईकोर्ट उचित आदेश पारित कर सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इसके बाद पटना हाईकोर्ट में सुनवाई तेज हुई और अब पटना हाईकोर्ट का फैसला आ गया है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब साफ हो गया है कि पूर्णिया सांसद एक बार फिर Y+ श्रेणी की Pappu Yadav Security में रहेंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें





