
Patna Bribe Case: सरकारी खजाने में सेंध लगाने वालों को आखिर उनके किए की सजा मिली। भ्रष्टाचार के दलदल में धंसे दो अधिकारियों को न्यायालय ने सलाखों के पीछे धकेल दिया। न्याय की इस राह में छह साल की लंबी सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने अपना अहम फैसला सुनाया है।
Patna Bribe Case: निगरानी की विशेष अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कार्यपालक अभियंता सुरेश प्रसाद सिंह और लेखा लिपिक सह कैशियर शशिभूषण कुमार को घूसखोरी का दोषी ठहराया है। अदालत ने इन दोनों को 14 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
सुरेश प्रसाद सिंह पर पांच लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे जमा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसी तरह, लेखा लिपिक शशिभूषण कुमार पर भी तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, इसके भुगतान न होने पर उन्हें भी एक माह की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। यह सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वर्तमान में, सुरेश प्रसाद सिंह पटना के पश्चिम पथ प्रमंडल पथ निर्माण विभाग में और शशि भूषण कुमार लेखा लिपिक सह कैशियर के तौर पर पटना के कार्यपालक अभियंता के पथ प्रमंडल विभाग कार्यालय में कार्यरत हैं।
Patna Bribe Case: ऐसे खुली रिश्वतखोरी की पोल
शिकायतकर्ता अखिलेश कुमार जायसवाल की कंपनी, साज इन्फ्राकॉन प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड को बिक्रम वाया गोनमा मोड़ से अमहारा तक लगभग 40 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण का कार्य मिला था। इस बड़े सड़क निर्माण घोटाला परियोजना के लिए तीन करोड़ रुपये के सुरक्षित एडवांस के एवज में कार्यपालक अभियंता ने 32 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
यह मामला तब सामने आया जब 8 जून 2019 को सुबह करीब 10 बजे, पटना के पटेलनगर स्थित आवास से कार्यपालक अभियंता सुरेश प्रसाद सिंह और शशि भूषण कुमार को शिकायतकर्ता से 14 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई निगरानी ब्यूरो द्वारा की गई, जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें (https://deshajtimes.com/news/national/)। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
छह साल चली सुनवाई के बाद आया फैसला
इस मामले के अनुसंधानकर्ता, निगरानी ब्यूरो के डीएसपी इम्तियाज अहमद ने समय पर आरोप पत्र दाखिल कर कार्यवाही को आगे बढ़ाया। वहीं, प्रभारी विशेष लोक अभियोजक निगरानी किशोर कुमार सिंह ने सरकार की ओर से अभियोजन पक्ष को मजबूती से रखा और आरोपितों को दोषी सिद्ध कराने में सफलता हासिल की। छह साल तक लगातार चली सुनवाई के बाद, निगरानी की विशेष अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाया है। इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। यह न्यायिक प्रक्रिया एक मिसाल पेश करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




