पटना गांधी घाट हादसा: पटना के गांधी घाट पर मंगलवार को आस्था की डुबकी लगाने गए पांच युवकों के साथ जो हुआ, उसने सबको झकझोर कर रख दिया है। गहरे पानी में उतरते ही वे डूबने लगे और उन्हें बचाने कूदे एक युवक को भी गंगा की लहरों ने निगल लिया। इस दर्दनाक घटना में अब तक तीन शव बरामद हुए हैं, जबकि एक लापता की तलाश जारी है।
मंगलवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी घाट पर उस समय हड़कंप मच गया जब गंगा में स्नान करने उतरे पांच युवक अचानक गहरे पानी में चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह से ही घाट पर लोगों की भीड़ थी और कुछ युवक स्नान के लिए नदी में उतरे थे। तेज बहाव और अनुमान से अधिक गहराई होने के कारण वे खुद को संभाल नहीं पाए और डूबने लगे।
युवकों को डूबता देख वहां मौजूद चंदन कुमार नामक एक साहसी युवक ने बिना देर किए गंगा में छलांग लगा दी। वह उन्हें बचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन नदी के तेज बहाव ने उसे भी अपनी चपेट में ले लिया। चंदन भी लहरों के साथ बह गया, जिससे यह पटना गांधी घाट हादसा और भी भयावह हो गया।
पटना गांधी घाट हादसा: क्या हुआ उस दिन?
इस दर्दनाक घटना की सूचना मिलते ही पीरबहोर थाना पुलिस और SDRF की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। मोटरबोट और प्रशिक्षित गोताखोरों की मदद से तत्काल SDRF बचाव अभियान शुरू किया गया। यह घटना गांधी घाट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाती है, क्योंकि घाट पर अक्सर भीड़ रहती है और ऐसे में पर्याप्त निगरानी का अभाव बड़े हादसों को न्योता देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बचाव कार्य और लापता की तलाश
SDRF की टीम ने अथक प्रयास करते हुए काफी मशक्कत के बाद नदी से तीन शवों को बाहर निकाला। इन मृतकों की पहचान चंदन कुमार (बचावकर्मी), समर कुमार और अमित कुमार के रूप में हुई है। हालांकि, जय कुमार नामक एक युवक अब भी लापता है और उसकी तलाश लगातार जारी है। पुलिस और SDRF की टीमें गहन खोजबीन में जुटी हुई हैं।
सुरक्षा पर सवाल और आगे की कार्रवाई
इस हादसे के बाद गांधी घाट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों और परिजनों ने घाटों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि अगर घाट पर पर्याप्त लाइफगार्ड और चेतावनी बोर्ड होते, तो शायद इस तरह के हादसों से बचा जा सकता था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और लापता युवक की तलाश के साथ-साथ घटना के हर पहलू पर गौर किया जा रहा है। SDRF बचाव अभियान के बावजूद, इस दुखद घटना ने गंगा घाटों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
इस घटना ने एक बार फिर शहरी गंगा घाटों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे प्रशासन से अपने लापता बच्चे को जल्द ढूंढने की गुहार लगा रहे हैं। पटना गांधी घाट हादसा जैसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







