Patna Groundwater News: बिहार सरकार घटते भूजल स्तर की समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के लघु जल संसाधन विभाग द्वारा एक पायलट-स्केल इंजेक्शन वेल परियोजना शुरू की जाएगी। इस पहल के तहत बारिश के पानी को सीधे भूमिगत जलभृतों (aquifers) में पहुंचाया जाएगा, जिससे भूजल पुनर्भरण में सुधार होगा और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य जल-जीवन-हरियाली अभियान के माध्यम से भूजल संरक्षण में उत्साहजनक प्रगति की रिपोर्ट कर रहा है। पिछले आठ वर्षों में भूजल संकट से जूझ रहे ब्लॉकों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।
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Patna Groundwater News: कैसे काम करेगा इंजेक्शन वेल प्रोजेक्ट?
प्रस्तावित इंजेक्शन वेल प्रणाली के तहत, एकत्र किए गए बारिश के पानी को सीधे गहरे जलभृतों में पहुंचाया जाएगा। यह उन भूमिगत जल भंडारों को फिर से भरने में मदद करेगा, जो अत्यधिक निकासी और बदलती जलवायु परिस्थितियों के कारण सूख गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह तकनीक भूजल स्तर को स्थिर करने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस परियोजना के साथ-साथ, सरकार भूजल निकासी की निगरानी और नियंत्रण के उद्देश्य से एक नया नियामक ढांचा तैयार करने पर भी काम कर रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान से मिली बड़ी सफलता
एक हालिया सरकारी आकलन के अनुसार, जल-जीवन-हरियाली अभियान ने भूजल प्रबंधन में मापने योग्य सुधार किए हैं। 2017 में, बिहार में 102 ब्लॉक अर्ध-महत्वपूर्ण, गंभीर और अति-शोषण वाली भूजल श्रेणियों के तहत वर्गीकृत किए गए थे। 2025 तक, यह संख्या घटकर 64 हो गई है, जो कई जिलों में भूजल की स्थिति में पर्याप्त सुधार को दर्शाता है। राज्य ने संरक्षण कार्यक्रम के तहत तालाबों, आहरों, पोखर और पुराने कुओं सहित पारंपरिक जल निकायों के बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार का काम किया है। जल प्रतिधारण में सुधार और भूजल निकासी पर निर्भरता कम करने के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली, चेक डैम और भूजल पुनर्भरण संरचना जैसे अतिरिक्त उपाय भी लागू किए गए हैं।
बढ़ रहा हरा-भरा आवरण, किसानों को मिल रहा बेहतर लाभ
अधिकारियों ने बताया कि हाल के वर्षों में बिहार का हरित आवरण 9% से बढ़कर 15.5% हो गया है। सरकार ने अब व्यापक वृक्षारोपण अभियान और वनीकरण पहल के माध्यम से इस आंकड़े को 17% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ा हुआ वनस्पति आवरण भूजल पुनर्भरण में सुधार और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जल संरक्षण प्रथाओं, जैविक खेती और ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देने से कृषि क्षेत्र को भी लाभ हुआ है। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि बेहतर सिंचाई सुविधाओं और कुशल जल उपयोग ने कई क्षेत्रों में किसानों की आय में 25-30% की वृद्धि में योगदान दिया है।
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जल संसाधन विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन और वनीकरण में निरंतर निवेश भविष्य में पानी की कमी के जोखिम को काफी कम कर सकता है। उनका कहना है कि प्रस्तावित इंजेक्शन वेल परियोजना, यदि सफलतापूर्वक लागू की जाती है, तो बिहार की स्थायी जल प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण उपकरण बन सकती है।







