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फ़रवरी, 18, 2026
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पटना हाई कोर्ट से मंत्री संतोष कुमार सुमन को बड़ी राहत: ‘बिहार मिनिस्टर केस’ में FIR रद्द

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Bihar Minister Case: राजनीति के गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप और मुकदमों का सिलसिला आम है, लेकिन जब अदालत की चौखट पर न्याय का सूरज चमकता है, तो राहत की किरणें दूर तक जाती हैं। ऐसा ही कुछ बिहार की राजनीति में देखने को मिला है।

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पटना हाई कोर्ट से मंत्री संतोष कुमार सुमन को बड़ी राहत: ‘बिहार मिनिस्टर केस’ में FIR रद्द

मंत्री संतोष कुमार सुमन पर क्या था ‘बिहार मिनिस्टर केस’?

“Bihar Minister Case”: राजनीति के गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप और मुकदमों का सिलसिला आम है, लेकिन जब अदालत की चौखट पर न्याय का सूरज चमकता है, तो राहत की किरणें दूर तक जाती हैं। ऐसा ही कुछ बिहार की राजनीति में देखने को मिला है। पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन को एक आठ साल पुराने आपराधिक मामले में बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को पूरी तरह से रद्द करने का आदेश दिया है, जिससे मंत्री सुमन को बड़ी राहत मिली है।

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मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद पटना हाई कोर्ट ने 2017 में बोधगया पुलिस थाने में दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) को खारिज कर दिया। यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं, जैसे 341 (गलत तरीके से रोकना), 323 (जानबूझकर चोट पहुँचाना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज किया गया था। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में खूब सुर्खियां बटोरी थीं, और अब जाकर इसका पटाक्षेप हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह भी पढ़ें:  बिहार Liquor Ban: कांग्रेस MLA का विस्फोटक बयान, विधानसभा सदस्यों के ब्लड टेस्ट की मांग से गरमाई सियासत

क्या था बोधगया का पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, यह मामला 2017 में बोधगया के एक स्कूल के प्रिंसिपल द्वारा दर्ज कराया गया था। प्रिंसिपल ने आरोप लगाया था कि मंत्री संतोष कुमार सुमन और उनके समर्थकों ने एक सड़क जाम किया था और उन्हें रोकने के साथ-साथ उनके साथ मारपीट भी की थी। इसके साथ ही उन्हें धमकी भी दी गई थी। इस घटना के बाद बोधगया पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली थी, और तब से यह मामला कानूनी प्रक्रिया में फंसा हुआ था।

मंत्री संतोष कुमार सुमन, जो पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र हैं, ने हमेशा इन आरोपों का खंडन किया था। उन्होंने इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद, उनके राजनीतिक करियर पर मंडरा रहा एक बड़ा संकट टल गया है। यह फैसला उनके लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। बिहार के सियासी गलियारों में यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि एक मंत्री पर लगे आपराधिक मामले का रद्द होना निश्चित तौर पर उनकी छवि को और मजबूत करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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