Patna High Court News: बिहार के न्यायिक गलियारे में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला। जस्टिस मीनाक्षी मदन राय ने पटना हाईकोर्ट की नई मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने बिहार लोक भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी। इस नियुक्ति से राज्य की न्यायिक प्रक्रिया में एक नया अध्याय शुरू हो गया है।
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पदभार ग्रहण और न्याय की नई प्रतिज्ञा
शपथ ग्रहण समारोह बिहार लोक भवन में गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने संवैधानिक मर्यादा का पालन करते हुए जस्टिस राय को मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। शपथ के बाद दोनों गणमान्य व्यक्तियों ने सौहार्दपूर्ण ढंग से एक-दूसरे का अभिवादन किया। इस महत्वपूर्ण Bihar Judicial Appointment से राज्य में लंबित मुकदमों के शीघ्र निपटारे और न्यायिक प्रक्रियाओं में अपेक्षित तेजी आने की संभावना है।
समारोह में पटना हाईकोर्ट के कई माननीय न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्य प्रशासन के प्रमुख अधिकारी मौजूद थे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस राय की नियुक्ति बिहार की न्यायपालिका के लिए एक अनुभवी और कुशल नेतृत्व की शुरुआत है। इससे न्याय के इच्छुक लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
शानदार रहा जस्टिस राय का शैक्षणिक और न्यायिक सफर
जस्टिस मीनाक्षी मदन राय का जन्म 12 जुलाई 1964 को हुआ था। उनका शैक्षणिक और कानूनी करियर अत्यंत प्रभावशाली रहा है। उन्होंने गंगटोक और कुर्सियांग से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित लेडी श्री राम कॉलेज से राजनीति विज्ञान (ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की, जहां उन्हें सिक्किम सरकार द्वारा योग्यता छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई थी।
वर्ष 1989 में, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। जस्टिस राय ने 1990 में दिल्ली बार एसोसिएशन में एक वकील के तौर पर अपना पंजीकरण कराया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में कई वर्षों तक वकालत का अभ्यास किया, जिससे उन्हें न्यायिक प्रक्रिया की गहरी समझ मिली।
उनकी न्यायिक उपलब्धियां भी उल्लेखनीय हैं, जिसमें 15 अप्रैल 2015 को सिक्किम हाईकोर्ट की न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति शामिल है। वह सिक्किम से इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। सिक्किम हाईकोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई बार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सिक्किम राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पद पर रहते हुए, उन्होंने समाज के वंचित और अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक न्याय सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया, जिससे उनकी पहुंच न्यायपालिका तक आसान हो सकी।
उच्च स्तरीय कोलेजियम की सिफारिश और राष्ट्रपति की मुहर
जस्टिस मीनाक्षी मदन राय की इस नई जिम्मेदारी का मार्ग मई माह में प्रशस्त हुआ था। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाले सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने 22 मई को उनके नाम की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार ने सप्ताह की शुरुआत में इस कोलेजियम प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी थी।
केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी आधिकारिक घोषणा की। मंत्री मेघवाल ने बताया कि भारत के राष्ट्रपति ने संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए सिक्किम हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस मीनाक्षी मदन राय को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू के 4 जून को सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुए पद पर हुई है। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति ने इस नियुक्ति को मंजूरी दी थी।
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इस प्रकार, जस्टिस मीनाक्षी मदन राय की नियुक्ति बिहार की न्यायिक व्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान करेगी। उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में न्यायपालिका और अधिक सुदृढ़ होगी और आम नागरिकों को शीघ्र तथा प्रभावी न्याय मिल सकेगा।







