



Patna Marine Drive: गंगा की लहरों पर भले ही विकास का सूरज चमक रहा हो, लेकिन इसके किनारे कई जिंदगियों की उम्मीदें अभी भी अंधेरे में डूबी हैं। पटना की यह शान, आज सैकड़ों परिवारों के लिए एक अनसुलझी पहेली बन गई है।
पटना मरीन ड्राइव: चमकती सड़क, ठहरी जिंदगी! आखिर क्यों नहीं मिल रहे फूड स्टॉल?
पटना मरीन ड्राइव पर रोजगार का संकट गहराया
जेपी गंगा पथ-वे, जिसे पटना मरीन ड्राइव के नाम से भी जाना जाता है, पर फूड स्टॉल आवंटन में हो रही देरी अब केवल प्रशासनिक खानापूर्ति का विषय नहीं रह गई है, बल्कि सैकड़ों जरूरतमंद परिवारों की आजीविका पर गहरा संकट बनकर मंडरा रही है।
इस पथ-वे के किनारे सैकड़ों लोगों ने अपनी रोजी-रोटी के लिए छोटे-छोटे व्यापार शुरू करने का सपना संजोया था। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत यहां प्री-फैब्रिकेटेड दुकानें आवंटित की जानी थीं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके और पटना मरीन ड्राइव पर आने वाले पर्यटकों को भी सुविधाओं का लाभ मिल सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्यों फंसा है फूड स्टॉल आवंटन का पेच?
अधिकारियों और संबंधित विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण यह प्रक्रिया लगातार अटकी हुई है। जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं और अन्य छोटे व्यवसायी पिछले कई महीनों से इंतजार कर रहे हैं कि कब उन्हें इन स्टॉलों का कब्जा मिलेगा। उनका कहना है कि हर गुजरते दिन के साथ उनकी आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है। फूड स्टॉल आवंटन में हो रही यह देरी, सिर्फ सरकारी फाइलों का बोझ नहीं, बल्कि उन चेहरों की मायूसी है जो यहां बेहतर भविष्य की तलाश में आए थे।
कई लोगों ने इन स्टॉलों के लिए आवेदन करने के बाद से अपनी पुरानी छोटी-मोटी दुकानों या ठेलों को भी बंद कर दिया था, इस उम्मीद में कि उन्हें जल्द ही मरीन ड्राइव जैसी प्रतिष्ठित जगह पर काम करने का मौका मिलेगा। लेकिन, यह इंतजार अब उनके लिए दुःस्वप्न बन गया है। उनके बच्चे की शिक्षा, घर का किराया और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
प्रशासनिक उदासीनता या नीतिगत अड़चन?
स्थानीय प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। एक ओर जहां पटना मरीन ड्राइव शहर की सुंदरता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके किनारे रोजगार की तलाश में बैठे लोगों की उपेक्षा कहीं न कहीं इस चमक पर ग्रहण लगा रही है। इस समस्या का त्वरित समाधान निकालना होगा ताकि सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी सुनिश्चित हो सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जेपी गंगा पथ-वे परियोजना का उद्देश्य केवल शहर को एक नई पहचान देना नहीं था, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देना था। जब तक मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक इस परियोजना की पूरी सार्थकता अधूरी रहेगी। जिम्मेदार अधिकारियों को इस मामले में पारदर्शिता और तेजी दिखानी चाहिए।




