

Patna NEET Student Death Case: न्याय की राह अक्सर जटिल होती है, खासकर जब जिंदगी और मौत के सवाल हों। एक तरफ एक छात्र की अकाल मृत्यु का रहस्य है, दूसरी ओर कानून का कड़ा इम्तिहान। राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में गिरफ्तार बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन को फिलहाल जमानत नहीं मिल पाई है।
Patna NEET Student Death Case: कोर्ट ने CBI-SIT से पूछे कड़े सवाल
पटना उच्च न्यायालय ने इस बहुचर्चित पटना नीट छात्रा प्रकरण में सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और विशेष जांच दल (SIT) दोनों पर तीखे सवाल दागे हैं। अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। आरोपी मनीष रंजन पिछले 45 दिनों से अधिक समय से बेउर जेल में बंद है, और अब भी उसे न्यायिक हिरासत में रहना होगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 2 मार्च की तारीख तय की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया दोनों ही धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं। छात्रा की मौत के बाद से ही यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और इसमें कई पेच सामने आ चुके हैं।
गौरतलब है कि निचली अदालत ने पहले ही CBI से पूछा था कि मनीष की जरूरत क्या है और पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? इन सवालों ने जांच की दिशा और गहराई पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। न्यायपालिका का यह रुख दर्शाता है कि वह इस मामले की तह तक जाने के लिए प्रतिबद्ध है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
जांच एजेंसियों की भूमिका पर उठे सवाल
न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया है कि जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचना चाहिए और किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। पीड़ित परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है और समाज भी इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों पर दबाव है कि वे सभी सबूतों को मजबूती से पेश करें ताकि सच सामने आ सके।
इस पटना नीट छात्रा प्रकरण में हर पहलू की गहन जांच आवश्यक है ताकि किसी भी निर्दोष को सजा न मिले और दोषी बच न पाए। अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी कि क्या कोर्ट फिर से एजेंसियों पर सवाल उठाएगा या कोई नया मोड़ सामने आएगा।




