Patna PMCH News: पटना के पीएमसीएच में एक बार फिर आग लगने की घटना सामने आई है। सोमवार दोपहर माइक्रोबायोलॉजी विभाग में लगी भीषण आग से लाखों का सामान जलकर राख हो गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण भीषण गर्मी के चलते शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
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यह घटना उस समय हुई जब विभाग में परीक्षा चल रही थी। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते विभाग में रखी कीमती मशीनें, जरूरी सामान और दस्तावेज जलकर राख हो गए। आग की सूचना मिलते ही दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने के काम में जुट गईं।
कैसे लगी पटना पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में आग और कैसे पाया काबू?
जिला फायर कमांडेंट रितेश पांडेय ने बताया कि कंट्रोल रूम को दोपहर 2.10 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही तुरंत पांच दमकल की गाड़ियों को पीएमसीएच के लिए रवाना किया गया। दमकल कर्मियों को आग बुझाने में करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, जिसके बाद आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। फिलहाल आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी।
जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त विभाग में दो शिफ्टों में परीक्षा चल रही थी। परीक्षा लगभग खत्म होने वाली थी और सभी छात्र व स्टाफ बाहर निकलने की तैयारी में थे। इसी दौरान अचानक पूरा विभाग काले धुएं से भर गया और आग की तेज लपटें निकलने लगीं। स्थिति को भांपते हुए बिजली की सप्लाई तुरंत बंद कर दी गई, लेकिन तब तक आग पूरे विभाग में फैल चुकी थी। इस हादसे में वहां रखे कीमती उपकरण, फर्नीचर और अन्य दस्तावेज जलकर खाक हो गए, जिससे लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है।
बार-बार आग लगने की घटनाओं से सुरक्षा पर गंभीर सवाल
पीएमसीएच में सुरक्षा इंतजामों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि यहां आग लगने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले दो माह पूर्व पीएमसीएच के पैथोलॉजी विभाग में भी आग लग गई थी, हालांकि उसे समय रहते तुरंत बुझा दिया गया था। इसके अलावा, पीएमसीएच के स्त्री व प्रसूति विभाग के पुराने भवन में भी आग लगने की घटना सामने आ चुकी है। गौर करने वाली बात यह है कि हर बार शॉर्ट सर्किट से ही आग लगने की आशंका जताई जाती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान को लेकर ठोस कदम नहीं दिख रहे हैं, जिससे अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर होती है।
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यह लगातार हो रही घटनाएं अस्पताल में मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती हैं और आग से बचाव के लिए मजबूत कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर देती हैं।







