Patna Politics News: बिहार की राजनीति में सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। गुरुवार को लालू प्रसाद यादव के परिवार की सुरक्षा में कुछ अहम बदलाव किए गए। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा को लेकर नए आदेश जारी हुए, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की सुरक्षा में बड़ा फैसला
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z प्लस सुरक्षा में स्पेशल ब्रांच के चार सुरक्षाकर्मियों को दोबारा तैनात किया गया है। यह फैसला उनकी सुरक्षा में पहले हुई कटौती के बाद लिया गया है, जिसे आंशिक राहत के तौर पर देखा जा रहा है। Z प्लस सुरक्षा व्यवस्था देश की सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा श्रेणियों में से एक है, जिसमें बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कमांडो तैनात होते हैं। इस फैसले से उनकी सुरक्षा में हुई कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकेगा।
इसी क्रम में, बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था में भी महत्त्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। उनकी Y+ सुरक्षा में भी चार स्पेशल ब्रांच कर्मियों की बहाली की गई है। तेजस्वी यादव बिहार की राजनीति में एक प्रमुख युवा चेहरा हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। Y+ सुरक्षा में भी सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों का एक दल तैनात रहता है, जो किसी भी खतरे की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित होता है। इन बदलावों को राज्य सरकार द्वारा राजनीतिक हस्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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लालू प्रसाद यादव की सुरक्षा पर बना सस्पेंस
एक ओर जहां राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की सुरक्षा में आंशिक सुधार देखा गया है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सुरक्षा में पहले तैनात स्पेशल ब्रांच कर्मियों को अभी तक वापस नहीं लगाया गया है। लालू प्रसाद यादव, जो बिहार की राजनीति के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक हैं, उनकी सुरक्षा में हुए इस कथित बदलाव या यथास्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से उनकी सुरक्षा को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, लालू प्रसाद यादव की सुरक्षा में तैनात विशेष शाखा के जवानों को पहले कुछ कारणों से हटा लिया गया था। अब जबकि परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा में कर्मियों की वापसी हुई है, ऐसे में लालू यादव की सुरक्षा को लेकर कोई नया आदेश नहीं आना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। उनकी सुरक्षा को लेकर कोई नया निर्णय कब तक लिया जाएगा, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं।
सरकारी सुरक्षा के बिना तेजस्वी यादव का कोलकाता सफर
इन सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों के बीच, गुरुवार शाम नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपनी पत्नी राजश्री यादव के साथ कोलकाता के लिए रवाना हुए। बताया जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान उन्होंने सरकारी सुरक्षा घेरे का इस्तेमाल नहीं किया। यह खबर सामने आने के बाद कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। जब उनकी अपनी Y+ सुरक्षा में स्पेशल ब्रांच के कर्मियों की बहाली हुई है, ऐसे में उनका सरकारी सुरक्षा के बिना यात्रा करना एक असामान्य फैसला माना जा रहा है।
आम तौर पर, उच्च स्तरीय सुरक्षा प्राप्त नेता सरकारी यात्राओं या निजी यात्राओं पर भी अपने सुरक्षा घेरे के साथ चलते हैं। तेजस्वी यादव के इस कदम ने कई लोगों को चौंका दिया है और इसके पीछे के कारणों को लेकर राजनीतिक पंडित अपने-अपने अनुमान लगा रहे हैं। क्या यह सुरक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों पर उनकी असंतुष्टि का प्रतीक है, या कोई निजी कारण, यह अभी स्पष्ट नहीं है। राज्य में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा का मुद्दा हमेशा से ही संवेदनशील रहा है, और इस तरह के घटनाक्रम अक्सर बहस का विषय बन जाते हैं।
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बिहार में राजनीतिक हस्तियों की सुरक्षा हमेशा से ही एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा रहा है। इन आंशिक सुरक्षा बदलावों और लालू यादव की सुरक्षा पर लंबित फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राज्य सरकार को इस संबंध में जल्द ही कोई स्पष्टीकरण जारी करना पड़ सकता है ताकि किसी भी तरह की अटकलों पर विराम लग सके। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और क्या नए घटनाक्रम सामने आते हैं।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







