Patna Revenue Employee News: पटना में जिला प्रशासन ने राजस्व और भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी ने फर्जी लगान रसीदें जारी करने, अवैध जमाबंदी कायम करने और सरकारी नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोपों पर एक राजस्व कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई एक विस्तृत विभागीय जांच के बाद की गई है, जिसने सरकारी महकमों में हड़कंप मचा दिया है।
मधेश राम नामक यह कर्मचारी वर्तमान में पुनपुन अंचल कार्यालय में कार्यरत थे, लेकिन उनके खिलाफ जांच का मामला मसौढ़ी अंचल कार्यालय में उनकी पिछली तैनाती के दौरान के फर्जीवाड़े से जुड़ा है। जिलाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, भूमि अभिलेखों और राजस्व दस्तावेजों की सघन जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं का पता चला था, जिसके बाद यह कार्रवाई आवश्यक हो गई।
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फर्जीवाड़े का कैसे हुआ खुलासा?
जांच में यह सामने आया कि आरोपी कर्मचारी ने कथित तौर पर जाली लगान रसीदें तैयार की थीं। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर, उन्होंने भूमिधारकों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की सिफारिश भी की। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह सब सक्षम प्राधिकार के आदेश और निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए किया गया था, जो एक गंभीर कदाचार है।
Bihar Land Record Irregularities एक बड़ी समस्या है और इस मामले ने इसकी गंभीरता को उजागर किया है। जांच रिपोर्ट में यह भी पता चला कि वर्ष 2019-20 में जिन आवेदकों के नाम पर लगान रसीदें जारी की गई थीं, उस समय तक संबंधित जमाबंदी का कोई अस्तित्व ही नहीं था। बाद के वर्षों में विभिन्न दाखिल-खारिज मामलों और अन्य आदेशों के माध्यम से ही जमाबंदी कायम हुई।
विभागीय जांच और बर्खास्तगी की प्रक्रिया
जांच अधिकारियों ने पहले जारी की गई इन रसीदों को संदिग्ध और नियमविरुद्ध करार दिया। प्रशासन का मानना है कि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि राजस्व अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ कर पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए, मसौढ़ी के अनुमंडल पदाधिकारी ने आरोपी कर्मचारी के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर जिला प्रशासन को भेजा।
इसके बाद, विधिवत विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। अपर समाहर्ता, पटना को संचालन पदाधिकारी और मसौढ़ी के अंचल अधिकारी को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया, जिन्होंने दस्तावेजों और संबंधित तथ्यों की विस्तृत समीक्षा की। जिलाधिकारी ने बताया कि विभागीय जांच के दौरान लगाए गए सभी आरोप प्रमाणित पाए गए। आरोपी कर्मचारी को अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। जांच अधिकारियों ने उनके स्पष्टीकरण को तथ्यों से मेल नहीं खाने वाला पाया।
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पारदर्शिता और जवाबदेही का बड़ा संदेश
प्रशासन ने पुष्टि की कि फर्जी जमाबंदी, अवैध लगान रसीद और उसके आधार पर भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र के लिए की गई अनुशंसा जैसे मामलों में कर्मचारी की भूमिका स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई है। इसे सरकारी सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया। इसी आधार पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत सेवा से बर्खास्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
इस कार्रवाई से जिला प्रशासन ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि राजस्व और भूमि संबंधी मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या पद का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत जनहित से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमों का पूरी तरह पालन करें और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को निष्पक्षता के साथ लागू करें।
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भूमि रिकॉर्ड और राजस्व मामलों से जुड़े विवादों के बीच यह कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता और जवाबदेही को लेकर प्रशासन का अडिग रुख स्पष्ट हुआ है। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि ऐसी सख्त कार्रवाई भविष्य में होने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में सहायक सिद्ध होगी और नागरिकों का सरकारी तंत्र में विश्वास बढ़ेगा।







