
Patna Student Death Case: पटना से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में मुख्य आरोपी और हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को कोर्ट से जमानत मिल गई है। इस घटना ने एक बार फिर हॉस्टलों में छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Patna NEET Student Death Case: CBI की चूक से आरोपी को मिली जमानत, कोर्ट ने IO पर उठाए सवाल
Patna NEET Student Death Case: पटना के बहुचर्चित NEET छात्रा मौत मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। जांच एजेंसी CBI की लापरवाही ने आरोपी मनीष रंजन को जमानत दिला दी है, लेकिन यह फैसला सबूतों के आधार पर नहीं बल्कि एक कानूनी चूक के चलते आया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह न्याय की राह में एक बड़ी बाधा है?
गुरुवार को पटना सिविल कोर्ट ने Patna NEET Student Death Case में आरोपी मनीष रंजन को जमानत दे दी। यह जमानत सबूतों के आधार पर नहीं, बल्कि डिफॉल्ट बेल के तहत दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) निर्धारित 90 दिनों की समय सीमा के भीतर मामले में चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही। भारतीय कानून के अनुसार, यदि किसी गंभीर मामले में जांच एजेंसी तय समय पर आरोप पत्र दाखिल नहीं करती है, तो आरोपी को जमानत का अधिकार मिल जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस मामले में भी CBI ऐसा नहीं कर पाई, जिसके चलते आरोपी मनीष रंजन को डिफॉल्ट बेल मिली।
अदालत की नाराजगी और जांच अधिकारी पर कार्रवाई की सिफारिश
पटना सिविल कोर्ट ने इस मामले में CBI की लापरवाही को गंभीरता से लिया है। अदालत ने पूर्व में ही तय समय सीमा में चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद जांच में देरी हुई। इस गंभीर चूक को देखते हुए कोर्ट ने मामले के जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय जांच की अनुशंसा की है। यह साफ दर्शाता है कि अदालत इस लापरवाही को हल्के में नहीं ले रही।
हालांकि मनीष रंजन को जमानत मिल गई है, लेकिन उसकी रिहाई अभी बाकी है। गुरुवार को बेल बॉन्ड जमा नहीं हो सका। ऐसी उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी, जिसके बाद वह जेल से बाहर आ सकता है।
पीड़ित पक्ष का न्याय के लिए संकल्प
अदालत के इस फैसले के बाद भी पीड़ित परिवार और उनके समर्थक अपने न्याय के लिए अंतिम दम तक लड़ने के संकल्प पर कायम हैं। उनका कहना है कि वे इंसाफ के लिए आखिरी तक लड़ाई जारी रखेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
CBI के रवैये पर उठे सवाल
अदालत परिसर में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों का रवैया भी चर्चा का विषय रहा। आमतौर पर दबाव में दिखने वाली यह एजेंसी इस बार कुछ अलग अंदाज में नजर आई, जिससे कई तरह की बातें शुरू हो गई हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि जांच एजेंसियों को समय सीमा का सख्ती से पालन करना चाहिए। एक छोटी सी तकनीकी चूक भी पूरे केस को प्रभावित कर सकती है और न्याय की प्रक्रिया को बाधित कर सकती है। Patna NEET Student Death Case में CBI की यह चूक इसका बड़ा उदाहरण है।
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जहानाबाद की रहने वाली छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। 9 जनवरी को वह अपने कमरे में रहस्यमय परिस्थितियों में बेहोश पाई गई थी, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। छात्रा के पिता ने हॉस्टल मालिक मनीष रंजन पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश और शरीर पर चोट के निशान का जिक्र था। मनीष रंजन पर साक्ष्य मिटाने का भी आरोप है।
क्या था पटना छात्र मौत मामला?
इस गंभीर मामले में जेल में बंद हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को अब कोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट रूम में हुई कानूनी बहस के दौरान मनीष के वकीलों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187(2) का हवाला देते हुए डिफॉल्ट बेल की मांग की थी। उनकी दलील थी कि आरोपी को जेल में 90 दिन हो चुके हैं और पुलिस अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। विशेष लोक अभियोजक सुरेश चंद्र प्रसाद और पीड़िता के वकील एसके पांडेय ने इस दावे को चुनौती दी। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी को जेल में 90 दिन नहीं, बल्कि केवल 89 दिन हुए हैं। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्क को सही मानते हुए डिफॉल्ट जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें नियमित जमानत मिल गई।
न्याय की उम्मीद और पुलिस पर दबाव
पीड़ित परिवार के लिए यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि अपनी बेटी के लिए इंसाफ की गुहार है। उनकी बेटी डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी और नीट छात्रा की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना ने पटना जैसे शहरों में हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब पुलिस पर जल्द से जल्द ठोस चार्जशीट दाखिल करने का दबाव काफी बढ़ गया है, ताकि मामले का ट्रायल शुरू हो सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह सुनिश्चित करना अब पुलिस की जिम्मेदारी है कि इस Patna Student Death Case में कोई कोताही न हो और निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों को सजा मिले।
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