

पटना न्यूज़: प्यार की इबारत लिखने वाले इस खास दिन, जब हवाओं में मोहब्बत की खुशबू तैर रही थी, तब पटना की सड़कों पर एक अलग ही नजारा देखने को मिला। प्रेम के प्रतीक माने जाने वाले वैलेंटाइन डे के अवसर पर कुछ प्रेम युगलों को अनूठी नसीहतें मिलीं।
पटना न्यूज़: वैलेंटाइन डे पर प्रेमी जोड़ों को थमाई हनुमान चालीसा, संस्कृति बचाने का दिया संदेश
पटना न्यूज़: संस्कृति संरक्षण का अनूठा तरीका
वैलेंटाइन डे के मौके पर पटना में एक अनोखी घटना सामने आई, जिसने शहर में खूब सुर्खियां बटोरीं। हिंदू शिव भवानी सेना के कार्यकर्ताओं ने राजधानी की सड़कों पर प्रेमी युगलों को रोककर उन्हें हनुमान चालीसा भेंट की। यह कदम भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से उठाया गया था। कार्यकर्ताओं का तर्क था कि पश्चिमी सभ्यता से प्रेरित वैलेंटाइन डे का भारतीय संस्कृति में कोई स्थान नहीं है और युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शहर के प्रमुख इलाकों में शिव भवानी सेना के सदस्य सक्रिय दिखे। उन्होंने उन जगहों को निशाना बनाया जहां आमतौर पर युवा जोड़े इकट्ठा होते हैं। कार्यकर्ताओं ने प्रेमी जोड़ों से बातचीत की और उन्हें समझाते हुए कहा कि यह दिन प्यार का इजहार करने का नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं को याद करने का है। कई जगह तो कार्यकर्ताओं ने बॉयफ्रेंड का हाथ गर्लफ्रेंड से छुड़वाकर उनके हाथों में हनुमान चालीसा थमा दी। इस प्रेम दिवस विरोध अभियान का मकसद युवाओं को पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से दूर रखना था।
एक कार्यकर्ता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि अपनी युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के महत्व से अवगत कराना है। वैलेंटाइन डे भारत की परंपरा का हिस्सा नहीं है। हनुमान चालीसा एक शक्तिशाली ग्रंथ है जो हमें आध्यात्मिकता और मर्यादा का पाठ सिखाता है।” इस दौरान कुछ पोस्टर भी लगे थे जिन पर ‘जहां मिलेंगे बाबू सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना’ जैसे नारे लिखे थे, जो उनके कड़े रुख को दर्शा रहे थे। यह एक तरह से युवाओं के बीच भारतीय मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
शिव भवानी सेना का संदेश और प्रतिक्रिया
इस घटना पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कुछ लोगों ने शिव भवानी सेना के इस कदम का समर्थन किया और इसे भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाला बताया, वहीं कई युवा जोड़ों और अन्य नागरिकों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करार दिया। उनका कहना था कि प्रेम का इजहार किसी भी दिन किया जा सकता है और यह व्यक्तिगत पसंद का मामला है। संगठन के सदस्यों ने जोर देकर कहा कि वे आगे भी भारतीय संस्कृति के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे अभियान जारी रखेंगे। उनका मानना है कि युवाओं को पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध से निकलकर अपनी समृद्ध विरासत की ओर लौटना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटना दर्शाती है कि समाज में सांस्कृतिक पहचान को लेकर किस तरह के अलग-अलग विचार प्रचलित हैं।



