



Patna News: सियासी गलियारों में अक्सर हवाएं ऐसी चलती हैं कि अतीत की धूल फिर से उड़ने लगती है। लेकिन कभी-कभी ये हवाएं सिर्फ भ्रम होती हैं, जिनका हकीकत से कोई वास्ता नहीं होता। Patna News: बिहार की राजनीति में भी कुछ ऐसी ही अटकलें तैर रही थीं, जिन पर अब जदयू के शीर्ष नेता ने पूर्ण विराम लगा दिया है।
Patna News: JDU ने क्यों बंद किए वापसी के रास्ते?
पिछले कुछ दिनों से पटना के सियासी हलकों में यह चर्चा तेज थी कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह, जो कभी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का हिस्सा रहे थे, उनकी पार्टी में वापसी हो सकती है। इन जोरदार अटकलों के बीच, जदयू के कद्दावर नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह का बयान सामने आया है, जिसने बिहार की जदयू की सियासत को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने न केवल इन चर्चाओं को सिरे से खारिज किया, बल्कि दोनों नेताओं पर तीखा प्रहार करते हुए यह साफ संकेत दे दिया कि जदयू में उनके लिए अब कोई जगह नहीं है।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए ललन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कुशल नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश की, पार्टी की साफ छवि को धूमिल किया और भीतर से संगठन को तोड़ने का काम किया, उनके लिए जदयू में न तो कोई सहानुभूति है और न ही भविष्य की कोई गुंजाइश है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका यह बयान ऐसे नाजुक समय में आया है, जब बिहार की राजनीति में नए सिरे से समीकरणों के बनने की अटकलें जोर पकड़ रही हैं।
प्रशांत किशोर के संदर्भ में ललन सिंह का लहजा व्यंग्यात्मक था। उन्होंने कहा कि वह उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते तक नहीं। ललन सिंह ने याद दिलाया कि पीके ने एक बार दावा किया था कि जदयू को बिहार में 25 सीटें भी नहीं मिलेंगी और तो और उन्होंने राजनीति छोड़ने तक की बात कही थी। लेकिन चुनाव के नतीजे सबके सामने हैं; मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सशक्त नेतृत्व में पार्टी ने 85 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी। ललन सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने राजनीति छोड़ने की घोषणा की थी, उन्हें पहले अपने वादों पर अमल करना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आरसीपी सिंह के मामले में ललन सिंह का रुख और भी कठोर नजर आया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाए कि पार्टी के भीतर रहकर कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से भितरघात किया, जिसके कारण जदयू को भारी नुकसान उठाना पड़ा और विधानसभा सीटों की संख्या 72 से घटकर 42 तक आ गई। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और नेतृत्व ने इस क्षति की भरपाई कर ली है और बिहार की जनता ने एक बार फिर नीतीश कुमार पर अपना अटूट भरोसा जताया है।
विपक्षी खेमे, विशेषकर तेजस्वी यादव की बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए ललन सिंह ने संयमित रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी रणनीति बनाने और आवश्यक बैठकें आयोजित करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इन गतिविधियों से जदयू की संगठनात्मक मजबूती पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। आज की जदयू की सियासत में यह साफ है कि पार्टी भविष्योन्मुखी है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार का विकास एजेंडा लगातार गति पकड़ रहा है और जनता का विश्वास आज भी मजबूती से उनके साथ है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
जदयू का स्पष्ट संदेश: अतीत नहीं, भविष्य पर फोकस
कुल मिलाकर, ललन सिंह के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जदयू फिलहाल किसी ‘पुराने अध्याय’ को दोबारा खोलने के मूड में नहीं है। पार्टी अपनी राजनीति को सिर्फ संगठन की मजबूती, विकास के एजेंडे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्थिर नेतृत्व के इर्द-गिर्द ही आगे बढ़ाना चाहती है। यह संदेश साफ है कि जदयू अब उन चेहरों को स्वीकार नहीं करेगा जिन्होंने कभी पार्टी की बुनियाद को कमजोर करने का प्रयास किया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






