Bihar Politics: बिहार की सियासी चौखट पर इन दिनों गर्माहट कुछ ऐसी है, मानो किसी बड़े यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित हो रही हो। एक तरफ कानूनी दांवपेच की उलझी डोर, तो दूसरी ओर ‘राजकीय निवास’ की बदलती पहचान, ने राबड़ी देवी और लालू परिवार के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
बिहार पॉलिटिक्स: राबड़ी देवी का सरकारी आवास और लालू परिवार की बढ़ती कानूनी मुश्किलें, जानिए पूरा मामला
बिहार पॉलिटिक्स: राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर गहराया संकट
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आधिकारिक आवास को खाली करने की समयसीमा नज़दीक आने से राज्य की राजनीति में सरगर्मी और तेज हो गई है। भवन निर्माण विभाग ने लगभग दो माह पहले 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आवास को खाली करने का नोटिस जारी किया था, जिसके बाद से ही यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
एक ओर, जहां लालू परिवार के सदस्य लैंड फॉर जॉब मामला में कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, वहीं राबड़ी देवी के आवास का मुद्दा उनके लिए एक और परेशानी का सबब बन गया है। यह आवास बिहार की राजनीति में कई ऐतिहासिक घटनाओं और फैसलों का गवाह रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब देखना यह है कि यह मामला कानूनी और राजनीतिक गलियारों में और कितनी हलचल पैदा करता है।
लालू परिवार की बढ़ती कानूनी उलझनें
लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़ी कानूनी चुनौतियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। लैंड फॉर जॉब मामला में केंद्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता लगातार बनी हुई है, जिससे परिवार की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। इस मामले में कई बार पूछताछ हो चुकी है और कोर्ट में भी सुनवाई जारी है। राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित परिवार के अन्य सदस्यों के नाम इसमें सामने आए हैं, जिसने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
क्या है 10 सर्कुलर रोड आवास का मामला?
10 सर्कुलर रोड स्थित आवास बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए आरक्षित रहा है। राबड़ी देवी, चूंकि पूर्व मुख्यमंत्री हैं, इस नाते उन्हें यह आवास आवंटित किया गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, वर्तमान नियमों के तहत यह आवास अब खाली किया जाना है। भवन निर्माण विभाग ने उन्हें आवास खाली करने के लिए दो महीने का समय दिया था, जिसकी अवधि अब पूरी होने वाली है। यह कदम राज्य सरकार की तरफ से सरकारी आवासों के आवंटन और खाली कराने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कवायद का हिस्सा माना जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण पर राजनीतिक गलियारों में जोरदार बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बता रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे नियमों का पालन बताकर सरकार के कदम को सही ठहरा रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि राबड़ी देवी और लालू परिवार इस दोहरी चुनौती का सामना कैसे करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



