

Rajasthan Factory Blast: जब कहीं दूर आग की लपटें उठती हैं, तो उनका धुआं अक्सर कई घरों के चिराग बुझा देता है। राजस्थान की एक फैक्ट्री में उठे धुएं ने बिहार के पांच परिवारों में हमेशा के लिए अंधेरा कर दिया है, जहां पेट पालने गए मज़दूर मौत के मुंह में समा गए।
हादसा: आखिर कैसे हुआ यह Rajasthan Factory Blast?
राजस्थान के एक औद्योगिक क्षेत्र में स्थित केमिकल फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना में बिहार के पांच मेहनतकश मज़दूरों ने अपनी जान गंवा दी है। सभी मृतक पूर्वी चंपारण के मोतिहारी जिले के बताए जा रहे हैं, जो बेहतर भविष्य की तलाश में अपने घरों से दूर काम करने गए थे। यह खबर सुनते ही उनके पैतृक गांवों में मातम पसर गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर पलायन और औद्योगिक सुरक्षा के मुद्दों को सामने ला दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री में धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास का इलाका भी दहल उठा। मौके पर पहुंची बचाव टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला। शुरुआती जांच में केमिकल रिएक्शन को धमाके का कारण बताया जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और मुआवजे का ऐलान भी किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, प्रत्येक मृतक के परिवार को अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी।
पीड़ित परिवारों को राहत: क्या मिला मुआवज़े का आश्वासन?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राजस्थान सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर सभी आवश्यक सहायता सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मुश्किल घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। मारे गए मोतिहारी के मज़दूर अपने परिवारों के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, और उनकी मौत से इन परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
यह घटना औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है ताकि कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह सिर्फ पांच लोगों की मौत नहीं, बल्कि उन पांच परिवारों की उम्मीदों का अंत है, जिनके लिए ये मज़दूर रोज़ी-रोटी कमाने गए थे।





