

Rajya Sabha Election Bihar: बिहार की सियासत में इन दिनों हर चाल एक नई कहानी गढ़ रही है, जहां संख्या बल से ज्यादा कूटनीति का बोलबाला है। राज्यसभा की पांच सीटों का संग्राम अब केवल गणित का खेल नहीं, बल्कि हर दल के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है।
बिहार में राज्यसभा Election Bihar: पांचवीं सीट पर घमासान, छोटे दल बने ‘किंगमेकर’
राज्यसभा Election Bihar: सीटों का समीकरण और छोटे दलों का दांव
16 मार्च को होने वाले इस महत्वपूर्ण चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में जोड़-तोड़ का दौर अपने चरम पर है। एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है, और इसी आंकड़े ने छोटे राजनीतिक दलों, निर्दलीय विधायकों तथा क्षेत्रीय समीकरणों को अचानक से अत्यधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राजद, जदयू और भाजपा जैसे बड़े दलों के लिए भी यह चुनाव एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या के हिसाब से, भाजपा और जदयू आसानी से अपनी एक-एक सीट निकालने में सफल दिख रही हैं, जबकि राजद अपनी दो सीटों पर जीत का परचम लहरा सकती है। हालांकि, पांचवीं सीट के लिए खींचतान चरम पर है, जहां कोई भी बड़ा दल अकेले दम पर जीत हासिल नहीं कर सकता। यहीं पर छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका निर्णायक हो जाती है। उनकी पसंद यह तय करेगी कि पांचवीं सीट किसके खाते में जाएगी। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा का एक महत्वपूर्ण संकेतक भी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
रणनीति और समीकरण का खेल
इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM, मायावती की बसपा और वामपंथी दलों के विधायक भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन छोटे दलों के पास भले ही कुछ ही विधायक हों, लेकिन उनके सामूहिक वोट 41 के जादुई आंकड़े को छूने में निर्णायक साबित हो सकते हैं। बड़े दल इन विधायकों को साधने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि एक-एक वोट कीमती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बिहार की राजनीति में यह चुनाव आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए भी एक तरह का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि जो दल इन छोटे खिलाड़ियों को अपने पक्ष में करने में सफल रहेगा, वही पांचवीं सीट पर जीत का परचम लहराएगा। यह सिर्फ सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों की नींव भी रखेगा। यह चुनाव बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ ला सकता है।





