पटना न्यूज़: बिहार में सियासी पारा चढ़ गया है! अभी विपक्ष के नेता का चुनाव हुआ ही था कि महागठबंधन के अंदर से ही बगावत के सुर उठने लगे. RJD के ही एक बड़े नेता ने कांग्रेस पर ऐसा हमला बोला है कि दिल्ली तक हलचल मच गई है. सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार को घेरने से पहले ही विपक्ष आपस में बिखर जाएगा?
तेजस्वी सर्वसम्मति से बने नेता, पर खुशी में पड़ा ‘विघ्न’
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद विपक्षी खेमे ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है. इसी कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से विपक्ष का नेता चुन लिया गया है. यह फैसला महागठबंधन के विधायक दल की बैठक में लिया गया, जिसमें सभी सहयोगी दलों की सहमति थी. इस औपचारिक घोषणा के बाद माना जा रहा था कि विपक्ष एकजुट होकर सत्ता पक्ष को सदन में घेरेगा, लेकिन कुछ ही घंटों में इस एकता की तस्वीर पर सवालिया निशान लग गए.
खुशी के इस माहौल में उस वक्त एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया, जब खुद RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने सहयोगी दल कांग्रेस के खिलाफ एक बड़ा और विवादास्पद बयान दे दिया. इस बयान ने महागठबंधन की नींव को हिलाकर रख दिया है.
राजद प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला
एक तरफ तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्ष की एकजुटता का संदेश दिया जा रहा था, तो दूसरी तरफ RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोल दिया. उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन और गठबंधन में उसकी भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उनके इस बयान को ‘वोट बम’ की तरह देखा जा रहा है, जिसने सीधे तौर पर सहयोगी दल को कटघरे में खड़ा कर दिया है. इस अप्रत्याशित हमले ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि यह बयान किसी छोटे-मोटे नेता का नहीं, बल्कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का है.
महागठबंधन के भविष्य पर उठे सवाल
मंगनीलाल मंडल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष को सबसे ज्यादा एकजुट रहने की जरूरत है. इस बयान के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं:
- क्या यह मंगनीलाल मंडल का निजी बयान है या इसके पीछे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भी सहमति है?
- क्या RJD और कांग्रेस के बीच अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है?
- इस सार्वजनिक बयानबाजी से क्या महागठबंधन की एकता पर असर पड़ेगा?
- क्या तेजस्वी यादव के लिए नेता चुने जाने के साथ ही पहली चुनौती घर को संभालने की आ गई है?
इस घटनाक्रम ने बिहार की सियासत को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. जहां तेजस्वी यादव के सामने विपक्ष को एकजुट रखने की चुनौती है, वहीं सत्ताधारी दल को विपक्ष पर हमला करने का एक बड़ा मौका मिल गया है. अब देखना यह होगा कि महागठबंधन के नेता इस अंदरूनी कलह को कैसे संभालते हैं और इसका बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ता है.







