Bihar Politics: सियासत की बिसात पर, कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो भले ही परदे के पीछे हों, लेकिन उनकी चालें आज भी हवा का रुख बदल देती हैं। ऐसा ही एक नाम है जो बिहार के राजनीतिक गलियारों में फिर से गूंज रहा है।
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में शिवानंद तिवारी का ‘बाबा’ अवतार
बिहार पॉलिटिक्स: शिवानंद तिवारी की राजनीतिक वापसी के मायने
एक दौर था जब समाजवादी विचारधारा के अग्रणी नेताओं में शिवानंद तिवारी का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता था। लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले शिवानंद तिवारी को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर ‘बाबा’ कहकर संबोधित किया जाता है। यह संबोधन सिर्फ उम्र के लिहाज़ से नहीं, बल्कि उनके अनुभव, राजनीतिक समझ और पार्टी के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक भी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि सक्रिय राजनीति से कुछ समय से दूर रहने के बावजूद, शिवानंद तिवारी की पैनी नज़र बिहार की हर राजनीतिक उठापटक पर बनी रहती है। उनके समर्थक मानते हैं कि ‘बाबा’ का यह तेवर बिहार की राजनीति में आने वाले बड़े बदलावों का संकेत हो सकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
हाल ही में उनके बयानों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भले ही वह किसी पद पर न हों, लेकिन उनकी राय का वज़न आज भी कम नहीं हुआ है। उनकी प्रतिक्रियाएं और विश्लेषण अक्सर सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ देते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सियासी गलियारों में ‘बाबा’ की धमक
शिवानंद तिवारी की सक्रियता एक ऐसे समय में बढ़ी है, जब बिहार की राजनीति में समीकरण लगातार बदल रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड के बीच गठबंधन की स्थिति, भाजपा की रणनीतियां और कांग्रेस का प्रदेश में बढ़ता हस्तक्षेप, ये सभी ऐसे मुद्दे हैं जिन पर शिवानंद तिवारी जैसे अनुभवी नेता की राय महत्वपूर्ण हो जाती है। उनकी स्पष्टवादिता और बेबाक टिप्पणी के लिए उन्हें जाना जाता है, जिससे कई बार राजनीतिक दलों को असहज स्थिति का सामना भी करना पड़ता है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ‘बाबा’ की यह वापसी केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे पर्दे के पीछे से अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। खासकर ऐसे समय में जब अनुभवी नेताओं की कमी महसूस की जा रही है, शिवानंद तिवारी जैसे दिग्गज की उपस्थिति पार्टी और गठबंधन के लिए एक बड़ी ताकत साबित हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनकी दूरदर्शिता और ज़मीनी हकीकत की समझ उन्हें एक अद्वितीय स्थान दिलाती है।

