विकास की जिस रेलगाड़ी का डिब्बे सालों से फाइलों के जंगल में अटके थे, अब उसे हरी झंडी मिल गई है।
Bihar Rail Project: 188 किलोमीटर लंबी सीतामढ़ी–जयनगर–निर्मली रेल परियोजना को 17 साल के लंबे इंतजार के बाद डी-फ्रीज कर दिया गया है, जिसने मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्रों में नई उम्मीदें जगाई हैं।
Bihar Rail Project: मिथिलांचल-सीमांचल को मिलेगा सुपर ट्रैक
यह परियोजना, जो दशकों से ठंडे बस्ते में थी, अब एक बार फिर से जीवंत हो उठी है। 188 किलोमीटर लंबी यह महत्वपूर्ण रेल लाइन, जो सीतामढ़ी, जयनगर और निर्मली को जोड़ेगी, अब क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है। इस कदम से न केवल यात्रा सुगम होगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और कृषि को भी बढ़ावा मिलेगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रेलवे के इस फैसले से इलाके के लोगों में खुशी की लहर है, क्योंकि यह केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि इस इलाके के लिए क्षेत्रीय विकास का द्वार खोलने वाली कड़ी साबित होगी।
सरकार और रेलवे प्रशासन की ओर से इस परियोजना को लेकर दोबारा गंभीरता दिखाई गई है, जो क्षेत्र की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है। यह केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि उन्नति की एक नई गाथा लिखने की शुरुआत है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
परियोजना का महत्व और भविष्य की योजनाएं
इस परियोजना का डी-फ्रीज होना दर्शाता है कि सरकार सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। यह रेल लाइन न केवल यात्रियों के लिए सहूलियत लाएगी, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगी, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना के डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को अपडेट किया जा रहा है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

