
तेजस्वी यादव: बिहार में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अररिया जिले में हुए खौफनाक डबल मर्डर ने सूबे की सियासत को गरमा दिया है और विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का सीधा मौका दे दिया है। यह घटना सत्ताधारी गठबंधन के ‘सुशासन’ के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
अररिया डबल मर्डर: रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना
बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज में हुई दोहरे हत्याकांड की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। दिनदहाड़े हत्या, उसके बाद कटे सिर के साथ सार्वजनिक प्रदर्शन और फिर बदले में दूसरी हत्या ने प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। घटना की भयावहता ही ऐसी थी कि किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। इस घटना ने ‘जंगलराज बनाम सुशासन’ की बहस को एक बार फिर से तेज कर दिया है।
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तेजस्वी यादव का सीधा हमला: ‘महाचौपट राज’ का आरोप
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना को सीधे तौर पर ‘कानून व्यवस्था की विफलता’ बताया है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए मौजूदा एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में एनडीए सरकार अपराध नियंत्रण में पूरी तरह असफल है। उन्होंने इसे ‘जंगलराज’ नहीं, बल्कि ‘महाचौपट राज’ बताया है। अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “बिहार में महाचौपट राज की इससे बड़ी तस्वीर क्या हो सकती है? यह घटना साफ दिखा रही है कि बिहार में कानून व्यवस्था किस हद तक बदहाल हो चुकी है।”

तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि बिहार में भाजपा-जदयू ‘सीएम चेयर’ की राजनीति में उलझे हुए हैं, जबकि राज्य में हर दिन लूट, हत्या, अपराध और दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने भाजपा को घेरते हुए यह भी कहा कि ‘सिर काट कर घूमने का दृश्य अभी हाल ही में आई प्रोपेगंडा फिल्म का दृश्य था, भाजपा सरकार अपने प्रोपेगेंडा के लिए जो जहर समाज में भर रही है ये भी दिल दहलाने वाला है। जहर की खेती का खामियाजा अब दिखना शुरू हो चुका है।’ आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
NDA के लिए ‘सुशासन’ की चुनौती
सत्ताधारी गठबंधन के लिए अररिया डबल मर्डर की घटना सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि अपनी छवि बचाने की भी एक बड़ी चुनौती है। पिछले कुछ वर्षों में एनडीए ने ‘सुशासन’ को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं उस दावे को कमजोर करती हैं और विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका देती हैं, खासकर तब जब घटना में भीड़ के सामने हिंसा और बदले की कार्रवाई जैसी बातें सामने आती हैं। इन घटनाओं से राज्य की सामाजिक-प्रशासनिक संरचना पर भी सवाल उठते हैं। बिहार में एनडीए राज नहीं, ‘महाचौपट राज’ है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
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