
Bihar Rajya Sabha Election: बिहार की सियासत में आजकल राज्यसभा चुनाव की बिसात बिछी है, जहां मोहरे और प्यादे अपनी चालें चल रहे हैं। सत्ता के गलियारों में सन्नाटा कम और फुसफुसाहट ज्यादा है। इस चुनावी संग्राम में तेजस्वी यादव के दावे और एआईएमआईएम के रुख ने एक नया ट्विस्ट ला दिया है, जिससे विपक्ष का गणित उलझता दिख रहा है।
राजद के राज्यसभा गणित में उलझन: AIMIM ने खोले पत्ते, बिहार राज्यसभा चुनाव में क्या होगा?
Bihar Rajya Sabha Election: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव द्वारा 41 विधायकों के समर्थन का दावा करने के बाद बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गर्माहट तेज हो गई है। हालांकि, उनके इस दावे पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी है, जिससे विपक्ष के अंदरूनी सियासी समीकरण और भी जटिल होते दिख रहे हैं।
अख्तरुल इमान ने तेजस्वी के दावे पर तंज कसते हुए कहा, “कल बारिश होगी तो छाता लेकर निकलेंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक उनसे या उनकी पार्टी से राज्यसभा चुनाव को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। यह बयान राजद के लिए एक झटके जैसा है, खासकर ऐसे समय में जब वह राज्यसभा की एक सीट अपने दम पर जीतने की उम्मीद कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अख्तरुल ईमान का बयान और बिहार राज्यसभा चुनाव पर असर
एआईएमआईएम के इस रुख से साफ है कि तेजस्वी यादव को अपनी गणित बिठाने के लिए और प्रयास करने होंगे। एआईएमआईएम के पास बिहार विधानसभा में एक विधायक है, और यह एक विधायक भी राज्यसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब मुकाबला कड़ा हो। अख्तरुल इमान का यह बयान दर्शाता है कि राजद को अपने समर्थकों को एकजुट करने में अभी और मशक्कत करनी पड़ेगी। मौजूदा सियासी समीकरणों को देखते हुए राजद को एआईएमआईएम का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण लग रहा है।
विपक्षी खेमे में विधायकों की संख्या को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। तेजस्वी यादव का 41 विधायकों का दावा तभी सही साबित हो सकता है जब उन्हें सभी छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का साथ मिले, जिसमें एआईएमआईएम का समर्थन अहम है। मौजूदा स्थिति यह है कि अगर एआईएमआईएम अपना समर्थन नहीं देती है, तो राजद के लिए राज्यसभा की सीट जीतना मुश्किल हो सकता है।
तेजस्वी के दावे पर सवालिया निशान
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष के बयान ने तेजस्वी यादव के दावे पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सिर्फ एक मजाकिया टिप्पणी नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संकेत है कि एआईएमआईएम आसानी से किसी के पाले में नहीं जाने वाली। उन्हें मनाने के लिए राजद को ठोस रणनीति के साथ सामने आना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/
यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या वे एआईएमआईएम को अपने पक्ष में लाने में सफल होते हैं। बिहार की राजनीति में छोटी पार्टियां अक्सर बड़े दलों के लिए गेम चेंजर साबित होती हैं, और एआईएमआईएम इस बार भी कुछ ऐसी ही भूमिका में दिख रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




