

Bihar Wedding: जब सात समंदर पार की प्रेम कहानी किसी देहाती माटी से जुड़ती है, तो उत्सव का रंग और भी गहरा हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा आजकल पटना के एक छोटे से गांव रूपस में देखने को मिल रहा है, जहां एक विदेशी बेटी ने अपनी जड़ों से जुड़कर अनूठी मिसाल पेश की है।
परंपरा और प्रेम का अनुपम Bihar Wedding
पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित अथमलगोला प्रखंड के रूपस गांव में इन दिनों खुशियों की बहार है। अमेरिकी मूल की मिशेल, जिनका संबंध इसी गांव से है, ने अपने जीवनसाथी बैलेस्टिक के साथ यहीं पर पूरी तरह से हिंदू रीति-रिवाजों के साथ शादी रचाई। इस अनूठे विवाह समारोह ने पूरे इलाके में एक खास उत्साह भर दिया है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मिशेल के पूर्वज यहीं के निवासी थे, जो बाद में विदेश में बस गए। लेकिन मिशेल ने अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा और जीवन के इस सबसे महत्वपूर्ण निर्णय के लिए अपनी पैतृक भूमि को चुना। गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि एक बेटी का अपनी संस्कृति और मिट्टी के प्रति प्रेम का इज़हार है।
इस विवाह ने दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच एक खूबसूरत पुल का काम किया है। यह एक अद्भुत सांस्कृतिक मिलन था, जहां अमेरिकी परंपराओं की झलक भारतीय संस्कारों में घुलमिल गई। मेहमानों ने इस अनोखी शादी में खूब ठुमके लगाए और नवदंपति को आशीर्वाद दिया। परिवार के सदस्यों और गांववालों ने मिलकर इस आयोजन को भव्य बना दिया। इस शादी की चर्चा पूरे जिले में हो रही है। लोग मिशेल के इस कदम की सराहना कर रहे हैं, जो आधुनिकता के दौर में अपनी जड़ों को नहीं भूले। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह बताता है कि परंपराएं आज भी कितनी मजबूत हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विदेश में जन्मी बेटी ने कैसे संजोई अपनी विरासत?
गांव के मुखिया और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी नवदंपति को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मिशेल ने यह साबित कर दिया है कि भले ही दूरियां बढ़ जाएं, लेकिन मन से जुड़ाव कभी कम नहीं होता। इस शादी ने ग्रामीण इलाकों में भी आधुनिकता और परंपरा के संगम का एक नया अध्याय जोड़ा है।
इस तरह के विवाह सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करते हैं और विभिन्न संस्कृतियों के प्रति सम्मान का भाव पैदा करते हैं। रूपस गांव अब सिर्फ अपनी पहचान से ही नहीं, बल्कि इस यादगार सांस्कृतिक मिलन के लिए भी जाना जाएगा। यह कहानी प्रेरणा देती है कि अपनी जड़ों से जुड़ा रहना कितना महत्वपूर्ण है, भले ही आप दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हों।



