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जनवरी, 2, 2026

महिला सशक्तिकरण पर दाग: बिहार में 25 हजार में लड़कियां मिल जाती हैं…’ कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति के बयान से बवाल

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महिला सशक्तिकरण: जब सियासत के गलियारों से निकलते शब्द मर्यादा की चौखट लांघते हैं, तो समाज में एक भूचाल-सा आ जाता है। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों कुछ ऐसा ही माहौल है, जहाँ एक मंत्री के पति के बोल ने महिलाओं के सम्मान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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महिला सशक्तिकरण पर दाग: मंत्री के पति के विवादित बयान से बिहार तक उबाल, महिला आयोग ने घेरा

महिला सशक्तिकरण के पैरोकारों में आक्रोश: बयान पर बिहार में तीखी प्रतिक्रिया

उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण मंत्री के पति द्वारा महिलाओं को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को एक नई दिशा दे दी है। इस विवादास्पद बयान के बाद, खासकर बिहार में इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष प्रोफेसर अप्सरा ने इस बयान को ‘महिला विरोधी’ करार देते हुए कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि मंत्री के पति का यह बयान बताता है कि समाज में कुछ लोग आज भी महिलाओं को लेकर रूढ़िवादी और अपमानजनक सोच रखते हैं।महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू का बयान आने के बाद बबाल मचा है।

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प्रोफेसर अप्सरा ने सख्त लहजे में कहा कि एक ओर जहां सरकारें महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता से जुड़े लोग ही महिलाओं का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे बयानों से महिला सशक्तिकरण की कल्पना की जा सकती है? यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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उन्होंने इस मामले में उत्तराखंड सरकार और स्वयं मंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। प्रोफेसर अप्सरा ने कहा कि अगर मंत्री अपने पति के बयान से सहमत नहीं हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से इसकी निंदा करनी चाहिए और उनसे किनारा करना चाहिए। उनकी चुप्पी इस बात का संकेत देती है कि वे भी कहीं न कहीं इस सोच का समर्थन कर रही हैं, जो देश की आधी आबादी के लिए बेहद निराशाजनक है।

बिहार महिला आयोग ने उठाई कार्रवाई की मांग

बिहार महिला आयोग ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड महिला आयोग से इस मामले में संज्ञान लेने और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। आयोग का मानना है कि ऐसे बयानों से समाज में गलत संदेश जाता है और महिलाओं के प्रति अपमानजनक मानसिकता को बढ़ावा मिलता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

प्रोफेसर अप्सरा ने जोर देकर कहा कि इस तरह के बयानों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे ऐसे महिला विरोधी बयानों की एकजुट होकर निंदा करें और दोषियों के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो बिहार महिला आयोग इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा ताकि महिलाओं के सम्मान से किसी भी कीमत पर समझौता न हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटना फिर से इस बात पर बहस छेड़ रही है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्तियों को अपने शब्दों का चयन कितनी सावधानी से करना चाहिए।

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