



Virat Ramayana Temple: दिल्ली की सर्द सियासत में जब बिहार की आस्था का रंग घुलता है, तो सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि भविष्य की इबारत भी लिखी जाती है।
Virat Ramayana Temple: राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लोकसभा सांसद शांभवी चौधरी और महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल की हालिया मुलाकात ने बिहार की राजनीतिक और सांस्कृतिक हलकों में गरमाहट ला दी है। इस बैठक को मोतिहारी में निर्माणाधीन विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर की प्रगति, उसकी भावी रूपरेखा और उससे जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मुलाकात सिर्फ एक सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है, जहां धर्म और विकास एक साथ चल रहे हैं। यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा।
Virat Ramayana Temple: मोतिहारी में आकार लेता भव्य सपना
मोतिहारी के कैथवलिया में बन रहा यह मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की श्रद्धा का प्रतीक है। इसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और यह जल्द ही विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मंदिर परिसर में 12 शिखर होंगे, जो विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित होंगे, जिसमें मुख्य शिखर 270 फीट ऊंचा होगा। यह कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर से भी ऊंचा बनने का दावा किया जा रहा है, हालांकि यह अंकोरवाट के मूल डिजाइन से प्रेरित है लेकिन भारतीय शैली में।
इस भव्य परियोजना की निगरानी महावीर मंदिर न्यास द्वारा की जा रही है, जो पटना के महावीर मंदिर के लिए भी जाना जाता है। आचार्य किशोर कुणाल इस परियोजना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस मुलाकात के दौरान, शांभवी चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री को मंदिर के अब तक के निर्माण की विस्तृत जानकारी दी और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की। यह मंदिर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
विकास और आस्था का संगम: बिहार के लिए नए आयाम
इस परियोजना को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों की ओर से अपेक्षित सहयोग मिल रहा है, जो इसकी समयबद्ध पूर्णता के लिए आवश्यक है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कैसे यह मंदिर बिहार को धार्मिक मानचित्र पर एक अग्रणी स्थान दिला सकता है। इस मंदिर के माध्यम से पूर्वी चंपारण जिले को वैश्विक पहचान मिलेगी और यह आध्यात्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मंदिर के निर्माण में पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का भी प्रयोग किया जा रहा है, जिससे यह आधुनिकता और परंपरा का बेजोड़ मिश्रण बन सके। इस तरह की परियोजनाएं न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करती हैं, बल्कि सामाजिक समरसता को भी मजबूत करती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


