Bihar Shivling: धर्म और इंजीनियरिंग का अनूठा संगम, यह कोई साधारण पत्थर नहीं, बल्कि आस्था का वह शिखर है जो अपनी अद्भुत यात्रा से पूरे देश का ध्यान खींच रहा है। दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग इस समय बिहार में न केवल आस्था का प्रतीक बन चुका है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक प्रबंधन की कुशलता का भी अद्भुत उदाहरण पेश कर रहा है।
तमिलनाडु के महाबलीपुरम से शुरू हुई इस असाधारण यात्रा ने 2178 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया है। 33 फुट ऊंचा और इतना ही लंबा यह देव प्रतिमा अब गोपालगंज की धरती पर विश्राम कर रही है, जहां इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह यात्रा अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं, जहाँ विशालकाय शिवलिंग को बिना किसी अवरोध के मीलों तक पहुंचाया गया है।
बिहार शिवलिंग: आस्था और तकनीक का अद्भुत समन्वय
महाबलीपुरम शिवलिंग की यह यात्रा इंजीनियरिंग के कई जटिल पहलुओं को चुनौती देती हुई आगे बढ़ी है। इस विशाल प्रतिमा को ले जाने के लिए विशेष रूप से निर्मित 260 पहियों वाला ट्रेलर उपयोग किया गया है। स्थानीय प्रशासन ने जगह-जगह सड़क मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, ताकि यह अद्भुत धरोहर अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंच सके।
गोपालगंज में जन सैलाब: दर्शन को उमड़ रही भीड़
वर्तमान में, यह भव्य शिवलिंग गोपालगंज जिले में रुका हुआ है। यहां हर दिन हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं, जो इस ऐतिहासिक यात्रा के प्रति अपनी श्रद्धा और कौतूहल व्यक्त कर रहे हैं। इस शिवलिंग का अंतिम गंतव्य बिहार के पूर्वी चंपारण में स्थित विराट रामायण मंदिर है, जहां इसकी स्थापना होनी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह परियोजना केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक विरासत में एक नया अध्याय भी जोड़ रही है। इस तरह के विशालकाय महाबलीपुरम शिवलिंग के स्थानांतरण में कई विभागों के बीच समन्वय और अथक प्रयास शामिल हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस अनूठी यात्रा ने बिहार को एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। यह दिखाता है कि कैसे दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयास से असंभव लगने वाले कार्य भी संभव हो सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




