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फ़रवरी, 20, 2026
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Purnia में Major accident: कारी कोसी नदी में डूबने से एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत

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पूर्णिया, देशज टाइम्स। जिला (Purnia, Bihar) से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां कारी कोसी नदी ( कोसी नदी – विकिपीडिया ) में डूबने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे इलाके में शोक और मातम का माहौल पैदा कर दिया है।

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बच्ची को बचाने की कोशिश में गई पांच जानें

यह दर्दनाक घटना जिले के कसबा प्रखंड अंतर्गत सुभाष नगर गांव की है। जानकारी के अनुसार, मृतकों में तीन पुरुष, एक महिला और एक बच्ची शामिल हैं।

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मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है। इसमें, गौरी कुमारी (9 वर्ष), सुलोचना देवी (32 वर्ष), सचिन कुमार (18 वर्ष), शेखर कुमार (19 वर्ष) और करण कुमार (20 वर्ष) शामिल है।

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स्थानीय लोगों और पुलिस के अनुसार, गौरी कुमारी का पैर फिसल गया और वह कारी कोसी नदी में डूबने लगी। अपनी बच्ची को डूबता देख उसकी मां सुलोचना देवी तुरंत नदी में कूद गईं। वहीं, मां-बेटी को डूबता देख परिवार के तीन अन्य सदस्य—सचिन, शेखर और करण—ने भी उन्हें बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी।

लेकिन दुर्भाग्यवश, पांचों की जान नहीं बच पाई और वे सभी नदी की तेज धारा में बह गए।

मौके पर मची अफरा-तफरी

जैसे ही घटना की खबर फैली, आसपास के लोग तुरंत नदी किनारे पहुंचे। परिवार के अन्य सदस्य और ग्रामीण चीख-पुकार मचाते हुए बचाव की कोशिश में जुट गए।

सूचना मिलने पर कसबा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों (divers) की मदद से शवों को नदी से बाहर निकाला। पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम (autopsy) के लिए अस्पताल भेज दिया।

गांव में पसरा मातम और कोहराम

यह घटना सुनते ही पूरे सुभाष नगर गांव में सन्नाटा और मातम छा गया। मृतकों के घरों में कोहराम मचा हुआ है। हर किसी की आंखों में आंसू हैं और पूरा गांव इस दुःखद हादसे से गमगीन है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना मानवता और परिवारिक रिश्तों की मिसाल भी पेश करती है। एक-दूसरे की जान बचाने की कोशिश में पूरे परिवार के पांच सदस्य नदी की लहरों में समा गए।

बिहार में अक्सर होती हैं ऐसी घटनाएं

गौरतलब है कि बिहार (Bihar – विकिपीडिया) के कई जिलों में बारिश और बाढ़ के समय नदियों में डूबने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। कोसी नदी को ” बिहार का शोक ” भी कहा जाता है, क्योंकि इसके किनारे अक्सर बाढ़ और जान-माल का नुकसान देखने को मिलता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन को नदी किनारे सुरक्षा प्रबंध, चेतावनी बोर्ड और स्थायी बचाव दल की तैनाती करनी चाहिए।

प्रशासन ने जताया शोक, परिवार को मदद का भरोसा

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस हृदय विदारक हादसे पर शोक जताया है। सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन मृतकों के परिजनों को सरकारी (compensation) मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में जुटा है। पूर्णिया का यह हादसा पूरे बिहार के लिए एक चेतावनी भरा सबक है। नदियों के किनारे सावधानी और सुरक्षा व्यवस्था की सख्त ज़रूरत है। एक छोटी सी लापरवाही या हादसा पूरे परिवार की जिंदगी छीन सकता है।

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