

Pappu Yadav Arrest: बिहार की राजनीति में भूचाल तब आया जब एक पुराना मामला फिर से सुर्ख़ियों में आ गया। पटना में अचानक उस वक्त राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के मंदिरी स्थित आवास पर पुलिस की टीम 35 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी वारंट लेकर पहुंच गई। यह खबर जंगल की आग की तरह फैली और देखते ही देखते सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया। इस कार्रवाई की टाइमिंग ने इसे सीधा सियासी बहस के केंद्र में ला दिया है।
Pappu Yadav Arrest: टाइमिंग पर सवाल, सियासी अखाड़ा गरम
पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब बिहार की राजनीति वैसे भी उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। दशकों पुराना यह मामला भले ही कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हो, लेकिन इसके पीछे की सियासी बिसात को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। विपक्षी दल इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष इसे कानून के दायरे में हुई सामान्य प्रक्रिया करार दे रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर 35 साल बाद ही क्यों यह वारंट एक्टिव हुआ?
बिहार की सियासत में शुक्रवार रात जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला. पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को 31 वर्ष एक पुराने मामले में पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।. उन पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 1995 में पटना के एक घर पर कब्जा कर लिया था, जिसमें वह किराये पर रहने गए थे. पप्पू यादव ने इस किराये के घर में पहले अपना दफ्तर खोला, फिर उस पर कब्जा कर लिया. इसे लेकर उनके खिलाफ मकान मालिक ने एफआईआर दर्ज कराई थी.
पप्पू यादव, जो अपनी बेबाक बयानबाजी और ग्राउंड पर सक्रियता के लिए जाने जाते हैं, उनकी गिरफ्तारी ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। पूर्णिया से सांसद बनने के बाद से ही वे लगातार सक्रिय हैं। उनके समर्थक इसे राजनीतिक साज़िश करार दे रहे हैं, जबकि आम जनता भी इस अचानक हुई कार्रवाई पर अपनी-अपनी राय रख रही है। यह घटना निश्चित रूप से आने वाले समय में बिहार की राजनीति पर गहरा असर डालेगी।
गिरफ्तारी के पीछे की कहानी
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला 1989 के एक विवाद से जुड़ा है, जिसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि इस वारंट को इतने लंबे समय बाद सक्रिय करना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। कानूनी विशेषज्ञ भी इसकी टाइमिंग को लेकर हैरान हैं। यह मामला फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा और पप्पू यादव को अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका मिलेगा।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर न्यायपालिका और राजनीतिक शक्ति के बीच के संबंधों पर बहस छेड़ दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। क्या यह सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी सियासी चाल है, यह आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। फिलहाल, बिहार में राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है और हर कोई अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट
पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने उनके समर्थकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन की खबरें भी आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से बिहार के राजनीतिक समीकरणों में कुछ बदलाव आ सकता है। विशेषकर, सीमांचल क्षेत्र में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है, जहां पप्पू यादव का मजबूत जनाधार है।
इस पूरे मामले में सत्ताधारी दलों की चुप्पी और विपक्षी दलों का आक्रामक रुख, दोनों ही अपनी-अपनी कहानी बयां कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला किस दिशा में जाता है और इसका आगामी चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ता है।


