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मार्च, 11, 2026
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Samastipur Police Custody: समस्तीपुर पुलिस की बर्बरता, ज्वेलरी चोरी के आरोपी के प्राइवेट पार्ट में डाला पेट्रोल, थानाध्यक्ष समेत 3 निलंबित

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Samastipur Police Custody: जहाँ न्याय की उम्मीद टूटने लगे और रक्षक ही भक्षक बन जाएं, वहाँ कानून का राज खतरे में पड़ जाता है। बिहार के समस्तीपुर में एक ऐसी ही हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते 28 दिसंबर की रात ताजपुर थाना क्षेत्र में एक ज्वेलरी दुकान से 28 किलो चांदी और 60 ग्राम सोने की चोरी के मामले ने एक नया और वीभत्स मोड़ ले लिया है। इस घटना की जांच के दौरान पुलिस हिरासत में एक दुकान कर्मी की बेरहमी से पिटाई और उसके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालने का सनसनीखेज आरोप सामने आया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पीड़ित की शिकायत के बाद समस्तीपुर एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने मामले को प्रथम दृष्टया सही पाते हुए कड़ी कार्रवाई की है।

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एसपी ने थानाध्यक्ष शंकर शरण दास, अनुसंधानकर्ता राजवंश कुमार और एक सिपाही राहुल कुमार सहित तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस चौंकाने वाली खबर के सामने आते ही पुलिस प्रशासन की जमकर आलोचना हुई और जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। यह एक गंभीर Police Torture Case है जिसने पुलिस की छवि को धूमिल किया है।

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पीड़ित मनीष कुमार, जो भेरोखड़ा गांव निवासी संजय पोद्दार का पुत्र है, ने ताजपुर बाजार के नीम चौक स्थित सोनी ज्वेलर्स नामक आभूषण दुकान में काम करने का आरोप लगाया था। मनीष का आरोप है कि दुकान मालिक जकी अहमद की शिकायत पर पुलिस ने दुकान में काम करने वाले तीन कर्मियों को शक के आधार पर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। हालांकि, कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें बॉन्ड पर छोड़ दिया गया था। इससे पहले 31 दिसंबर को, दुकानदार ने दुकान की छत पर तीनों कर्मियों की बेरहमी से पिटाई की और फिर उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।

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Samastipur Police Custody: पुलिस कस्टडी में बर्बरता की इंतहा

मनीष के अनुसार, उसे 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक पुलिस कस्टडी में रखा गया, जहाँ उसके साथ लगातार मारपीट की गई। उसकी हालत गंभीर होने पर पाँच जनवरी को उसे बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद परिजनों ने उसे इलाज के लिए ताजपुर रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ से उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। मनीष ने इलाज के दौरान ही अपनी आपबीती सुनाई, जिसमें पुलिस द्वारा उसके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालने जैसे अमानवीय कृत्य का भी जिक्र है। यह घटना मानवीय अधिकारों का घोर उल्लंघन है।

मनीष की माँ संगीत देवी ने बताया कि उनके बेटे को बेवजह फंसाया जा रहा है। उनके पति संजय पोद्दार और मनीष की पत्नी को भी तीन दिनों तक थाने में रोके रखा गया। इस दौरान उनके घर की तलाशी भी ली गई, लेकिन कोई भी गहना बरामद नहीं हुआ। पीड़ित का यह भी आरोप है कि इसके बावजूद उसके साथ मारपीट जारी रही और जबरदस्ती जुर्म कबूलने का दबाव बनाया गया। परिवार ने यह भी दावा किया कि उसकी पत्नी और पिता को छोड़ने के लिए थाने पर 50 हजार रुपये भी लिए गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

चोरी और झूठे आरोप का काला सच

पीड़ित मनीष के अनुसार, उसने नीम चौक स्थित सोनी फैंसी ज्वेलर्स में लगभग एक महीने पहले ही काम शुरू किया था। 28 दिसंबर की शाम दुकान मालिक ने उसे छत का गेट लगाने को कहा था। अगले दिन, 29 दिसंबर की सुबह उसे दुकान बुलाया गया और बताया गया कि 28 किलो चांदी और 60 ग्राम सोने के आभूषण चोरी हो गए हैं। जब वह दुकान पहुँचा, तो दुकानदार मोहम्मद जकी उसे छत पर ले गया, जहाँ उसके दो दोस्तों के साथ मिलकर लोहे की रॉड और पाइप से उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। उसे नीचे फेंकने की धमकी भी दी गई। इसी दौरान किसी ने पुलिस को सूचना दे दी, जिसके बाद पुलिस उसे थाने ले गई और यातनाओं का दौर शुरू हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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