सारण ब्लैक स्पॉट: सारण जिले में सड़क पर मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ तेज रफ्तार और लापरवाही लोगों की जान ले रही है, तो दूसरी तरफ प्रशासन की सुस्ती गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिले में चिन्हित 40 ब्लैक स्पॉट आज भी असुरक्षित हैं, जहाँ हर दिन हादसे का खतरा मंडराता रहता है।
सारण जिले में सड़क हादसे लगातार लोगों की जान ले रहे हैं, लेकिन चिन्हित ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा इंतजाम अब भी अधूरे हैं। जिले में इस समय 40 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 12 ऐसे स्थान हैं जहाँ सड़क दुर्घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। सबसे ज्यादा हादसे उन स्टेट हाइवे और ग्रामीण संपर्क पथों पर हो रहे हैं, जो नेशनल हाइवे से जुड़ते हैं। यहाँ वाहन चालक सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर जरूरी इंतजाम नदारद हैं।
क्यों जानलेवा बन रहे हैं सारण ब्लैक स्पॉट?
ब्लैक स्पॉट वाले अधिकतर इलाकों में अंधे मोड़ और डिवाइडर के पास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगाए गए हैं। सड़क सुरक्षा के लिहाज से जरूरी रेडियम युक्त साइन बोर्ड भी गायब हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तीखे मोड़ों पर डिवाइडर लगाकर वाहनों की स्पीड नियंत्रित करने की जरूरत है। जब तक स्पीड कंट्रोल और चेतावनी संकेतों की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक हादसों पर रोक लगाना मुश्किल है।
नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे पर नियमित पुलिस पेट्रोलिंग नहीं होने से भी सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। हालाँकि डीएम और एसएसपी समय-समय पर सड़क सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश जारी करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित नजर आता है। शहरी इलाकों के अलावा चिन्हित दुर्घटना स्थलों पर पुलिस गश्ती बेहद जरूरी मानी जा रही है। एसपी विनीत कुमार ने सभी थानाध्यक्षों को एनएच और एसएच पर नियमित गश्ती का निर्देश दिया है। कई जगहों पर बैरिकेडिंग और साइन बोर्ड लगाए भी गए हैं, लेकिन इसके बावजूद चालकों में जागरूकता की कमी साफ दिख रही है।
सारण के सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट
सारण के कुछ सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट जहाँ हादसों का खतरा अधिक है:
- फोरलेन, दिघवारा डुमरी फोरलेन
- डोरीगंज मानपुर
- दरियापुर टेकनिवास मोड़
- छपरा-गड़खा हाइवे फुलवरिया मोड़
- मकेर गड़खा-मानपुर रोड भेल्दी मोड़
- नेवाजी टोला फ्लाइओवर
- मेथवलिया फोरलेन मोड़
- दाऊदपुर बनवार ओवरब्रिज
जिम्मेदार विभागों की सुस्ती और आमजन की लापरवाही
जिले में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ने के पीछे कई बड़ी वजहें सामने आ रही हैं। प्रमुख कारणों में साइन मार्क का नहीं होना, ओवरटेकिंग, तेज रफ्तार, चमकीले रेडियम संकेतों की कमी और तीखे मोड़ों पर स्पीड कंट्रोल नहीं होना शामिल है। इसके अलावा सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता की कमी भी हादसों की बड़ी वजह बन रही है।
सवाल यह है कि जब ये सारण ब्लैक स्पॉट पहले से चिन्हित हैं, तो फिर वहाँ सुरक्षा के स्थायी इंतजाम क्यों नहीं हो पा रहे? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। आखिर कब तक लोग इन मौत वाले मोड़ों पर अपनी जान गंवाते रहेंगे? सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभागों की सुस्ती अब सीधे लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती दिख रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







